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लखनऊ वालों पर 'महंगाई बम' फोड़ेगा नगर निगम

Sat, 02 Aug 2014 02:46 AM IST
प्रवेंद्र/अमर उजाला, लखनऊ
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पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता पर नगर निगम ने भी टैक्स का बोझ बढ़ाने की तैयारी कर ली है। अपने खर्चों का बोझ कम करने के लिए नगर निगम ने जनता पर करों का भार लादने का इरादा बनाया है।
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नगर निगम हाउस टैक्स, वाटर टैक्स से लेकर कल्याण मंडप तक के किराए में जबरदस्त बढ़ोतरी करने जा रहा है। इतना ही नहीं अब घर के सामने गाड़ी खड़ी करने पर भी टैक्स लगेगा।

अपनी तंगहाली दूर करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने इस आशय का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया हैं। जिसे आगामी 16 अगस्त को होने वाली नगर निगम सदन की बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
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नगर निगम पर दो अरब की देनदारी

करीब दो अरब की देनदारी, वेतन और विकास कार्यों के बढ़ते खर्चों का बोझ कम करने के लिए नगर निगम जनता पर ‘महंगाई बम’ फोड़ने जा रहा है।

इसके पीछे नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि पार्षद कोटा बढ़कर करीब 150 करोड़ रुपये हो गया है।

मार्ग प्रकाश, सड़क निर्माण-मरम्मत, जल निकासी, कूड़ा निस्तारण के पूर्व में हुए कार्यों की देनदारी भी करीब 180 करोड़ रुपये हो गई है।

कर्मचारियों के वेतन भत्ते का खर्च भी बढ़ा है। उसके बाद भी राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। दूसरी ओर एसटीपी संचालन के लिए नगर निगम के हिस्से का पैसा काटकर जल निगम को दिया जा रहा है।

हाउस टैक्स में होगी 50 फीसदी वृ‌द्घि

दो दिन पहले संविदा सफाई कर्मियों के वेतन में की गई बढ़ोतरी से भी नगर निगम पर करीब 40 करोड़ रुपये सालाना का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में नगर निगम के कामकाज और जनसुविधाओं के संचालन के लिए नगर निगम की आय में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया है।

नगर निगम गृहकर (आवासीय व अनावासीय) निर्धारण की दरों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने जा रहा है। इसके लिए नए सिरे से गृहकर की दरों का निर्धारण किया जाएगा। इसका प्रस्ताव नगर निगम सदन में पेश किया जाएगा।

नई दरों को अगले वित्तीय वर्ष से लागू किए जाने की तैयारी है। अगर प्रस्ताव को सदन की मंजूरी मिल गई तो नई दरों का निर्धारण करने के लिए कमेटी गठित की जाएगी।

जो डीएम सर्किल रेट के हिसाब से गृहकर निर्धारण के लिए वार्षिक किराया मूल्यांकन के लिए प्रति वर्ग फिट दर का निर्धारण करेगी। दरों को तय करने के बाद उन पर आपत्तियां मांगी जाएंगी।

4,75,753 मकानों से लेता है गृहकर

नगर निगम अधिनियम में किए गए प्रावधान के तहत नगर निगम प्रशासन दो साल में एक बार नए सिरे से गृहकर का निर्धारण कर सकता है। नगर निगम ने हाल में चार साल पहले 2010 में गृहकर की दरों में बढ़ोतरी की थी।

वर्तमान में नगर निगम 4,75,753 मकानों से गृहकर वसूल करता है। इससे उसे करीब 1 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। वहीं, जलमूल्य बढ़ाने के लिए एक बार फिर नगर निगम प्रशासन ने तैयारी की है।

पूर्व में दो बार यह प्रस्ताव जलकल विभाग की ओर से सदन में रखा गया लेकिन इसे मंजूर नहीं किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक पेयजल का मूल्य करीब सात गुना तक बढ़ जाएगा।

अभी दो रुपये प्रति किलो लीटर के हिसाब से पैसा लिया जाता है। प्रस्ताव पास होने के बाद पानी का मूल्य खपत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में छह से 15 रुपये प्रति किलो लीटर तक वसूल किया जाएगा

एक समान वाटर टैक्स

अभी आवासीय भवनों से एक सामान जल मूल्य लिया जाता है। चाहे कोई भवन कम खर्च करता हो या ज्यादा। नए प्रस्ताव में यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

पानी की खपत के आधार पर आवासीय भवनों को चार श्रेणियों में बांटा है। उसी आधार पर जलमूल्य तय किया गया है। आवासीय की तरह ही व्यावसायिक उपयोग की दरें भी प्रतिष्ठान में पानी के उपयोग के आधार पर तय की गई है।

जिन प्रतिष्ठानों में पानी का उपयोग सामग्री के रूप में किया जाता है, वहां पानी की दरें चार गुना की गई हैं। इनमें कोल्ड स्टोरेज, आइसक्रीम फैक्ट्री, बाटलिंग प्लांट, नर्सरी, बगीचा व केमिकल फैक्ट्री आदि शामिल हैं।

इसी तरह होटल लाज, डेरी, लांड्री, सर्विस स्टेशन व गैराज को अलग श्रेणी में रखा गया है। इनका जलमूल्य तीन गुना कर दिया गया है। उधर, नगर निगम अब घर के बाहर गाड़ी पार्क करने वालों से भी शुल्क वसूलेगा।

सार्व‌जनिक वाहनों से भी लिया जाएगा टैक्स

इसी तरह शहर की मंडियों, मंडी समितियों, टैम्पों स्टैंड तथा प्रमुख बाजारों में खड़े होने वाली ट्रक, लारी व छोटी गाड़ियां से भी शुल्क वसूला जाएगा।

सड़क पर गाड़ियां खड़ी करने वालों से शुल्क वसूली का प्रस्ताव यदि पास हो गया तो नगर निगम को सालाना करीब 36 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। निगम प्रशासन के अनुमान के तहतशहर में करीब 12 लाख वाहन हैं।

इनमें से करीब एक लाख वाहन सड़क पर ही खड़े किए जाते हैं। यदि ऐसे वाहनों पर दस रुपए प्रतिमाह प्रति वाहन रुपए ही प्रति दिन शुल्क लिया जाए तो हर महीने करीब तीन करोड़ रुपए की आय होगी।

प्रस्ताव में कहा गया है कि अभी नगर निगम को ऐसे वाहनों से कोई शुल्क नहीं मिलता। जबकि ये वाहन नगर निगम की सीमा में व्यवसाय करते हैं और नगर निगम की सेवाओं (मार्ग प्रकाश, सफाई व सड़क) का उपयोग करते हैं।
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हर साल होगी चार करोड़ की आमदनी

इसके साथ ही विवाह व अन्य समारोह के दौरान बारात घर व गेस्ट हाउस के आसपास भी सार्वजनिक सड़क पर गाड़ियां खड़ी की जाती हैं। ऐसे बारात घरों और गेस्ट हाउस से यूजर चार्ज वसूल किया जाएगा।

इनसे यदि शुल्क वसूल किया जाए तो हर साल करीब 4 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है। एक साल बाद नगर निगम कल्याण मंडपों के किराए में फिर बढ़ोतरी करने जा रहा है।

पिछली बार किराए में दोगुना तक बढ़ोतरी की गई थी। लेकिन इस बार इसे चार गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। किराए में बढ़ोतरी का जो प्रस्ताव नगर निगम ने तैयार किया है।

उसके तहत सबसे कम (1850 रुपये) बढ़ोत्तरी माधव कल्याण मंडप सुदर्शनपुरी के किराए में की गई है। वहीं सबसे अधिक चार गुना बढ़ोतरी मनकामेश्वर वार्ड के बरौलिया स्थित सामुदायिक केंद्र के किराए में की गई है। इस सामुदायिक केंद्र का किराया 2500 से 10000 रुपये प्रस्तावित किया गया है।
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