लखनऊ। नगर निगम कार्यकारिणी की सोमवार (आज) को बैठक होने जा रही है, लेकिन इसमें जनता के लिए कुछ नहीं है। सफाई, सड़क, मार्ग प्रकाश जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए पुनरीक्षित बजट पास कराने के बजाय इसमें पुराने मामलों की समीक्षा होगी। जारी एजेंडे में महज दो प्रस्ताव हैं। पहला-पुराने प्रस्तावों की समीक्षा और दूसरा-15वें वित्त से स्वीकृत प्रस्तावों पर विचार। ऐसे में बजट के लिए विशेष बैठक बुलाए जाने के बजाय सामान्य बैठक बुलाने पर नगर निगम में सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम का पुनरीक्षित बजट सितंबर में पास हो जाना चाहिए था, मगर अब तक नहीं हुआ। जबकि सफाई कार्य से जुड़ी गाड़ियों के लिए डीजल-पेट्रोल का बजट करीब डेढ़ महीने पहले ही खत्म हो चुका है। काम चलाने के लिए तीन करोड़ का बजट अलग से दिया गया है।
विकास कार्यों के लिए बजट बढ़ाए जाने की जरूरत है, क्योंकि मूल बजट में इनके लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी तरह कूड़ा प्रबंधन के लिए बजट की जरूरत है। ऐसे में पुनरीक्षित बजट को पास किया जाना जरूरी है, लेकिन यह टल रहा है। सामान्य बैठक बुलाए जाने की वजह से अब एक सप्ताह और बजट बैठक नहीं हो सकती है।
वित्तीय मामलों को लेकर जिम्मेदारों में जबरदस्त खींचतान
नगर निगम के जिम्मेदारों के बीच वित्तीय मामलों को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है। इसमें 15वें वित्त मद का बजट एक बड़ा मसला है। इसमें 20 करोड़ से अधिक का बजट जलकल के रास्ते जल निगम की कांस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) इकाई को ट्रांसफर होना है। लेकिन, इकाई के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी फेर में बजट का ट्रांसफर फंसा हुआ है। इसके कारण ही त्रिवेणीनगर के एकतानगर सहित कई जगहों पर नलकूप लगाने का काम भी बीच में रोका गया है।
पिछली बैठक के वे प्रस्ताव जिन पर नहीं हुआ अमल, फिर से होगी चर्चा
- शहर में अवैध रूप से घर-घर से कूड़ा लेने का काम करने वाले बांग्लादेशियों को 15 नवंबर तक हटाया जाना था, लेकिन नहीं हटाया जा सका।
-शहर के 33 वार्डों में सफाई का काम करने के लिए कार्यदायी संस्था लॉयन सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज को आदेश भी नहीं दिया जा सका।
-नगर निगम की केंद्रीय कार्यशाला में बनने वाले नगर निगम के नए मुख्यालय का निर्माण नवंबर में शुरू होना था, पर नहीं हो सका।
- सीएम ग्रिड योजना में 186 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सात सड़कों का काम अक्तूबर में शुरू हो जाना था, लेकिन अब तक नहीं हो सका।
पहले पुनरीक्षित बजट पास करने के लिए कार्यकारिणी बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। सामान्य बैठक बुलाना जरूरी था तो उसे बाद में बुलाया जा सकता था। जनहित के कार्यों के लिए बजट को पास करना जरूरी है। बैठक को एक सप्ताह के अंदर बुलाया जाए।
कामरान बेग, नेता सपा पार्षद दल
सितंबर में ही पुनरीक्षित बजट पास हो जाना चाहिए था। यह पहले से ही लेट है ऐसे में सामान्य कार्यकारिणी बैठक बुलाने के बजाए पहले विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। इसी महीने बैठक बुलाकर बजट पास किया जाए।
ममता चौधरी, नेता कांग्रेस पार्षद दल