लखनऊ। छोटा इमामबाड़ा को अतिक्रमण मुक्त कराने के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नगर निगम से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) से स्मारक के सभी प्रवेश द्वारों के संरक्षण की स्थिति और उससे जुड़ी जानकारी भी मांगी है। अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने यह आदेश सैयद मोहम्मद हैदर रिजवी की 2013 में दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में शहर के संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और उन्हें अतिक्रमण से बचाने की मांग की गई है। कोर्ट ने इसी वर्ष सात जनवरी को शहर के संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा और अतिक्रमण हटाने से जुड़े निर्देश जारी किए थे। आदेश के तहत जिला प्रशासन और स्थानीय प्राधिकारियों को हुसैनाबाद स्थित छोटा इमामबाड़ा के प्रवेश द्वारों को अतिक्रमण मुक्त कराने और एएसआई को स्मारक की मरम्मत व संरक्षण कार्यों का अनुमानित विवरण बताने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान एएसआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि छोटा इमामबाड़ा सहित संरक्षित स्मारकों की मरम्मत प्रगति पर है, इसलिए याची की चिंता निराधार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि छोटा इमामबाड़ा के पश्चिमी गेट और कुछ दीवारों को तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। जब तक इन हिस्सों की पूरी तरह मरम्मत नहीं होती, ढहने का खतरा बना रहेगा, जनहानि भी हो सकती है।
यह देखते हुए अदालत ने कहा कि यह मुद्दा एएसआई और संबंधित ट्रस्ट को तुरंत ध्यान देने योग्य है। साथ ही जिला प्रशासन और स्थानीय प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि छोटा इमामबाड़ा के सभी प्रवेश द्वारों को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए।