एंटी भू माफिया एक्ट लागू होने के बाद से नगर विकास विभाग सभी निकायों से कई बार पत्र लिखकर कार्रवाई का ब्योरा मांग चुका है, लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एक उच्चाधिकारी ने बताया कि अब निकायों के टाल-मटोल को गंभीरता से लिया जाएगा।
भू-माफिया नगर निकायों की सैकड़ों एकड़ नजूल भूमि पर अब भी कब्जा जमाए हैं, वहीं अधिकारी कागजों पर सरकार की प्राथमिकता पूरी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर शासन व स्थानीय निकाय निदेशालय के कई आदेशों के बावजूद 9 नगर निगमों के अलावा करीब 230 से अधिक निकायों की सैकड़ों एकड़ भूमि पर अब भी कब्जा है। इसी वजह से नगर निकाय इस संबंध में शासन को जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
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एंटी भू माफिया एक्ट लागू होने के बाद से नगर विकास विभाग सभी निकायों से कई बार पत्र लिखकर कार्रवाई का ब्योरा मांग चुका है, लेकिन अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एक उच्चाधिकारी ने बताया कि अब निकायों के टाल-मटोल को गंभीरता से लिया जाएगा। हालांकि उन्हें एक सप्ताह का मौका और दिया जा रहा है। इसके बाद कार्रवाई तय है। उधर, ब्योरा न देने के पीछे अधिकारी और भू-माफिया के बीच गठजोड़ बताया जा रहा है। इसमें संपत्ति विभाग के बाबू से लेकर प्रभारी अधिकारी तक शामिल हैं।
9 नगर निगमों ने नहीं दी जानकारी
ब्योरा न देने वाले निकायों में नगर निगमों का रवैया सर्वाधिक निराशाजनक है। 17 नगर निगमों में से 9 निगमों ने अवैध कब्जे की सूचना नहीं दी है। इनमें वाराणसी, गोरखपुर, सहारनपुर, फर्रूखाबाद, कानपुर, प्रयागराज, आगरा, अयोध्या व मथुरा-वृंदावन शामिल हैं।