मानिकपुर थाना क्षेत्र के पूरे गत्तू का पुरवा बड़गौं गांव निवासी अनिल 28 साल पहले घर से मुंबई भागा था। ऑर्थर रोड और नासिक जेल में करीब 20 साल गुजारने के बाद दो दिन पहले घर लौटा तो अनीस बन चुका था।
उसकी आपबीती सुनकर परिजनों की आंखों से आंसू छलक आए। करीब 28 साल पहले मोहनलाल का सोलह वर्षीय पुत्र अनिल परिजनों से नाराज होकर मुंबई भाग गया।
वह अंधेरी वेस्ट के गांवदेवी में रहने लगा। अनिल के मुताबिक 1993 में मुंबई में बम ब्लास्ट के बाद कई इलाकों में दंगा हो गया।
वहां रहने वाले कुछ लोगों ने उसे बंधक बनाकर जख्मी कर दिया। कई दिनों बाद उसे होश आया तो लोग अनीस कहकर बुलाने लगे। भागने की कोशिश की उसे यातनाएं दी गईं।
पिटाई के साथ कई दिनों तक भूखा रखा जाता। बंधक बनाए लोगों ने वर्ष 1994 में उसे हत्या के एक मामले में फंसा दिया। वह खुद को बेकसूर बताता रहा लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी।