मिशन 2014 के लिए दिल्ली की सत्ता पर आंख गड़ाए रखने वाली सपा ने तीसरे मोर्चे की कवायद शुरू कर दी है।
वाईएसआर कांग्रेस के नेता वाईएस जगनमोहन रेड्डी की मंगलवार को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से प्रस्तावित गुफ्तगू को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
इस मुलाकात को केंद्र और आंध्र प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा का गणित है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी। कई राज्यों में कांग्रेस-भाजपा का जनाधार नहीं है।
यूपी के अलावा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार जैसे राज्यों में गैर कांग्रेसी-गैर भाजपा ताकतें मजबूत हैं।
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आध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस पर सपा की नजरें हैं। दोनों दलों में कई समानताएं हैं। वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के बंटवारे का विरोध किया था।
उन्होंने न केवल अपनी लोकसभा सदस्यता छोड़ी बल्कि उनकी मां विजयम्मा ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
जगनमोहन ने तो जेल में 125 घंटे भूख हड़ताल भी की थी। सपा ने भी आंध्र प्रदेश के बंटवारे का मुखर विरोध किया।
जगनमोहन कांग्रेस पर बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाते रहे हैं, यही आरोप मुलायम सिंह भी लगा चुके हैं।
सपा और वाईएसआर कांग्रेस सीबीआई के दुरुपयोग की बातें कहती रही हैं। दोनों ही अपने-अपने राज्यों में भाजपा और कांग्रेस की विरोधी हैं।
दोनों दलों की नजर मुस्लिम वोटों पर हैं। ऐसे में जगनमोहन की मुलायम सिंह और अखिलेश यादव से मुलाकात को लेकर दूरगामी अटकलें लगाई जा रही हैं।
कहा जा रहा है कि यूपी में सपा की कुछ सभाओं में जगनमोहन बतौर वक्ता दिखाई दे सकते हैं। इसके जरिये सपा तीसरे मोर्चे के लीडर का संदेश देना चाहेगी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दोनों दलों के नेताओं के बीत मंगलवार शाम को बात होगी। जगनमोहन कल शाम ही हैदराबाद से यहां आएंगे।
हालांकि, सपा नेताओं ने अधिकृत तौर उनके दौरे के संबंध में कोई जानकारी होने से इन्कार किया है।
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