सपा में महादंगल के बीच मुलायम सिंह यादव ने अपने भाई रामगोपाल यादव पर सीधा हमला किया। बुधवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर पहुंचे मुलायम ने कहा, बेटे और बहू के कहने पर रामगोपाल पार्टी को तोड़ रहे हैं।
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वे भाजपा अध्यक्ष से चार बार मिल चुके हैं। उन्हें के इशारे पर काम कर रहे हैं। रामगोपाल उन्हीं के पास पहुंच गए हैं, जिन्होंने फंसाया है। वे हमसे कहते तो बचा लेते।
मुलायम ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, समाजवादी पार्टी बनाने के लिए बड़ी मेहनत की है, तकलीफें झेली हैं, लाठियां खाई हैं। गरीबी के हालात में भी घर, परिवार छोड़ा। हम उस वक्त संघर्ष कर रहे थे, जब अखिलेश दो-ढाई साल के थे।
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मुलायम ने आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इन लोगों ने तकलीफें नहीं देखी, इन्होंने क्या संघर्ष किया है। मुलायम ने यादव सिंह कांड की ओर इशारा करते हुए कहा कि बेटे और बहू को बचाने के लिए भाजपा नेताओं के संपर्क में कौन था। फिर कहा, सभी जानते हैं कि रामगोपाल तीन बार अमित शाह से मिले हैं, लेकिन मुझे पता है कि चौथी बार कब मिले।
हमने किसी से नहीं की गठबंधन की बात
मुलायम ने कहा, दूसरे लोग भले ही गठबंधन को लेकर दूसरे दलों से बात कर रहे हैं, हमने अब तक किसी से भी बात नहीं की है।
हम तो सिर्फ शादी-ब्याह व अन्य निजी मौके पर ही दूसरे दल के नेताओं के यहां जाते हैं। हमसे जो मिलने आता हैं, उनसे मैं जरूर मिलता हूं, लेकिन गठबंधन पर कोई बात नहीं होती।
मुलायम, शिवपाल दिल्ली गए
मुलायम और शिवपाल सिंह यादव दोपहर बाद दिल्ली चले गए। उनकी अगली रणनीति वहीं बनेगी। वे उनके खेमे के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी और अखिलेश खेमे के मंत्री अभिषेक मिश्रा भी दिल्ली गए हैं। वे निर्वाचन आयोग में कुछ और कागजात दाखिल कर सकते हैं।
शिवपाल की तारीफ की
मुलायम ने अपने बराबर में बैठे शिवपाल की तारीफ की और इस दौरान भावुक भी हुए। कहा, आपातकाल में जब मैं जेल में था, शिवपाल ही मेरे पास आता-जाता था। गिरफ्तारी के डर से रात में कार्यकर्ताओं से मिलता था। उसके योगदान को कैसे भुलाया जा सकता है।
रामगोपाल ने बनाई अखिल भारतीय समाजवादी पार्टी
मुलायम ने कहा, रामगोपाल ने अखिल भारतीय समाजवादी पार्टी बना ली है और चुनाव आयोग से मोटर साइकिल चुनाव चिह्न मांग रहे हैं। अलग पार्टी बनाई है तो जो करना हो करो। उन्होंने साफ किया कि वे न तो पार्टी का नाम बदलेंगे और न ही सिम्बल।
अखिलेश को विवाद में नहीं फंसाना चाहता
मुलायम ने कहा, हम पार्टी को एक रखना चाहते हैं, साइकिल भी पास रहे। हमारे पास जो कुछ था, अखिलेश को सौंप दिया, किसी सलाह के बिना उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। वे ही अगले मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि हम किसी भी कीमत पर चाहते हैं कि पार्टी एक रहे।
दोनों पक्ष भले इन्कार कर रहे हों, लेकिन सपा में विभाजन हो गया है। सपा के दोनों धड़े अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। मुलायम-अखिलेश गुट ने इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस की ओर बढ़ रहे अखिलेश के हाथ
मुलायम से बगावत के बाद अब अखिलेश का कांग्रेस से हाथ मिलाकर चुनाव मैदान में उतरना लगभग तय हो गया है। जानकारों की मानें तो गठबंधन की जमीन तैयार हो गई है। चुनाव प्रचार की रणनीति तय हो चुकी है। औपचारिक एलान कभी भी हो सकता है।
निगाहें चुनाव आयोग पर
सपा के नाम और निशान पर चुनाव आयोग का फैसला 13 जनवरी को आने की संभावना है।