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...तो क्या फैसले के बाद भी चुनाव लड़ेगे मुलायम सिंह

Tue, 17 Jan 2017 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
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ऐसा लगता है कि मुलायम सिंह यादव को चुनाव आयोग से साइकिल छिन जाने का आभास हो गया था। सोमवार को वह अचानक शिवपाल के घर गए और फिर पार्टी मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कहा, अखिलेश मेरे कहने में नहीं है। आयोग का जो भी फैसला हो, हम चुनाव लड़ेंगे।
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लगभग पांच दशक की राजनीति में मुलायम को सियासी जोर-आजमाइश का पूरा अनुभव है। कहा जाता रहा है कि पहलवानी में धोबीपाट दांव लगाने वाले मुलायम इसका इस्तेमाल राजनीति में करते रहे हैं।

सपा नेता बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के बाद पनपे विपरीत माहौल को मुलायम ने कांशीराम से मिलकर अनुकूल बना लिया। सपा की स्थापना के 11 महीने बाद ही वह दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए। मुलायम को अब पहली बार झटका लगा भी है तो अपने बेटे से।
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अखिलेश की लोकप्रियता के सामने कमजोर पड़े मुलायम

- फोटो : amar ujala
दोनों के बीच विवाद की शुरुआत चार महीने पहले हो गई थी, लेकिन एक जनवरी को यह क्लाइमेक्स पर पहुंची। परिवार के विवाद के बीच मुलायम कहते रहे कि पूरी पार्टी एक है, कोई हमारा कहना नहीं टाल सकता। लेकिन, वह इन सबका असली मतलब जानते थे।

मुलायम के एक पुराने साथी नाम का खुलासा न करने के आग्रह पर कहते हैं, मुलायम सिंह को बहुत पहले से अहसास था कि पार्टी उनके हाथ से निकल गई है। अखिलेश की लोकप्रियता के सामने अब उनकी अपील कमजोर पड़ गई है। अखिलेश के साथ युवाओं का समर्थन है।

इसके बावजूद वह पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए अड़े हुए थे। उन्होंने ऐसे फैसले लिए जो अखिलेश समर्थकों के खिलाफ थे। उन्होंने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया। कई एमएलसी समेत युवा नेताओं को निष्कासित किया।
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अखिलेश पर लगाए आरोप

मुलायम जब सोमवार को सपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं से रू-ब-रू हुए तो उनकी बातों से लगा कि उन्हें आयोग के फैसले का अंदाजा लग गया है। उन्होंने अखिलेश पर मुस्लिम विरोधी फैसले लेने, कहना न मानने का आरोप लगाया।

कहा कि आयोग का फैसला जो भी हो, वह अखिलेश के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले उनके शिवपाल के घर जाने का भी मतलब निकाला जा रहा है।

माना जा रहा है कि आयोग के संभावित फैसले से पहले वह शिवपाल का हौसला बढ़ाने गए थे। वरना, चाहे दिन में छह बार बात करनी हो, वह शिवपाल को अपने घर पर बुलाते थे।
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