सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर पेंच फंस गया है। अखिलेश की इच्छा चुनाव हो जाने तक इस पद पर बने रहने की है तो मुलायम इस पद को छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
रविवार शाम को दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस में मुलायम ने कहा कि मैं पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष हूं, अखिलेश मुख्यमंत्री हैं और शिवपाल सिंह यादव प्रदेश अध्यक्ष हैं।
मुलायम के इस बयान से स्पष्ट है कि वह एक जनवरी को अधिवेशन में लिए गए फैसले को वे नहीं मान रहे हैं। मतलब साफ है कि वह अखिलेश खेमे से दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं।
मुलायम सोमवार को चुनाव आयोग जाएंगे और पार्टी सिंबल पर अपना दावा पेश करेंगे। जबकि अखिलेश खेमे ने पहले ही हलफनामा चुनाव आयोग को सौंप दिया है।
अमर सिंह बन रहे हैं रुकावट
अमर सिंह
कयास लगाए जा रहे हैं कि अमर सिंह की लखनऊ में मौजूदगी भी मुलायम-अखिलेश के बीच दूरियां बनी रहने का एक कारण हैं। मुलायम 5 जनवरी को दिल्ली से लखनऊ लौट रहे थे एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने के लिए अखिलेश जाने वाले थे पर उनके साथ अमर सिंह भी होने पर वह एयरपोर्ट नहीं गए।
वहीं, तब से लेकर मुलायम के रविवार सुबह दिल्ली जाने तक अखिलेश की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। खुद सीएम अखिलेश व उनके खेमे के कई नेता अमर की सपा में मौजूदगी पर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और उन्हें पार्टी से हटाने की मांग कर रहे हैं।
चुनाव आयोग भी मुलायम का पक्ष रखने के लिए अमर सिंह ही गए थे। अमर ने भी मुलायम के साथ मजबूती से खड़े होने की बात भी की थी। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बातचीत में कहा था कि मुलायम अकेले और बेहैसियत हैं, यह सुनने और सहने की क्षमता हमारी नहीं है। राजनीति बड़ी निर्मम और क्रूर है। राजनीति में किसी के साथ खड़ा होना अपराध है, शिवपाल इसी अपराध के अपराधी हैं।
भाजपा का एजेंट होने पर भी अमर ने दिया था जवाब
भाजपा का एजेंट होने के अखिलेश खेमे के नरेश अग्रवाल के आरोप पर उन्होंने कहा था कि एक व्यक्ति (नरेश अग्रवाल) जो राजनाथ सरकार में मंत्री रहे, बसपा और कांग्रेस में भी रहे। वर्तमान में सपा में हैं। उनका सर्वदलीय अनुभव है। वे हमें भाजपा का एजेंट बता रहे हैं। मेरी बैकडोर और चोर दरवाजे से राजनीति में दाखिल होने की प्रवृत्ति नहीं है।
सीएम अखिलेश पर भी साधा निशाना
अमर ने कहा, राजनीति में सत्ता की महत्ता को मैं प्रणाम करता हूं। सीएम की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जिनकी वजह से पार्टी में गतिरोध की परिस्थितियां बनीं, वे आज उनके प्रबल समर्थक हैं और जिनके घर पले-बढ़े, वे चाचा आज विरोधी हैं। कहा, मैं अखिलेश को चिरंजीवी और यशस्वी होने का आशीर्वाद देता हूं। उनके नए साधकों को शुभकामनाएं।
अमर, मुलायम खेमे के प्रमुख खिलाड़ी हैं। मुलायम उनसे अलग हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में पार्टी में समझौते की संभावना लगभग खत्म हो गई है।