सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अपने संसदीय क्षेत्र से बड़ा ख्वाब लेकर चले हैं।
मैनपुरी के क्रिश्चियन कालेज मैदान में उमड़ी भीड़ से उत्साहित मुलायम ने लोकसभा की सभी 80 सीटों पर दावा ठोंक दिया।
रैली में उन्हें प्रधानमंत्री के दावेदार के तौर पर प्रोजेक्ट किया गया। आजम खां ने नारे लगवाकर इसका साफ संदेश भी दे दिया।
खुद मुलायम सिंह ने केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनने और उसमें सपा की महत्वपूर्ण भूमिका होने का कई बार जिक्र किया।
सपा ने चुनावी रैलियों की शुरुआत 29 अक्तूबर को आजमगढ़ से की थी। दूसरी रैली बृहस्पतिवार को मैनपुरी में हुई।
मुलायम सिंह 1996 में यहीं से जीतकर संयुक्त मोर्चा सरकार में रक्षा मंत्री बने थे। 2004 और 2009 में भी इसी सीट से वह बड़े अंतर से चुनाव जीते।
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पिछले चुनाव में उन्हें 56 फीसदी से अधिक वोट मिले थे। अपने घर (गढ़) में उनके तेवर आजमगढ़ से थोड़ा बदले हुए थे।
भीड़ देखकर जोश से लबरेज और आक्रामक भी। निशाने पर थे कांग्रेस और नरेन्द्र मोदी। कहा, कांग्रेस की सत्ता में वापसी नहीं होनी और मोदी तो सिर्फ टीवी और गुजरात में हैं।
2014 में केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी। 17 गैर कांग्रेस-गैर भाजपा दलों की बैठक के साथ तीसरे मोर्चे के गठन की शुरुआत हो चुकी है।
इस मोर्चे में सपा सबसे बड़ा घटक है। तमिलनाडु में 39, पश्चिम बंगाल में 42 तो यूपी में 80 लोकसभा सीटें हैं। सपा की सरकार बनवाने के लिए उन्होंने सभी 80 सीटों पर जिताने की अपील की।
उन्होंने कई बार याद दिलाया कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए सपा को बड़ा मौका मिलने जा रहा है।
दरअसल, ऐसा कहकर अप्रत्यक्ष तौर पर उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री पद का दावेदार साबित किया। रैली के बाद आजम खां ने खुद उनके समर्थन में नारे लगवा कर इसकी तस्दीक भी की।
सपा मुखिया ने विधानसभा चुनाव में मैनपुरी, इटावा, कन्नौज समेत कई जिलों में सभी सीटों पर जीत का जिक्र किया। कहा, यहां का चुनाव हमें आप लोग लड़ाएंगे।
अपने रिश्तेदारों को चिट्ठी भेजो। चुनाव को पूरी गंभीरता से लेना। यह कहकर उन्होंने इलाके से आत्मीयता और लोगों पर भरोसा जताने की कोशिश की।
कहा, हमें कर्नाटक, पश्चिम बंगाल समेत पूरे देश का दौरा करना है। सब जगह जीतकर ही सरकार बनेगी। उन्होंने यूपी में मोदी इफेक्ट को फिर नकार दिया।
कहा, गुजरात में 26 लोकसभा सीटें हैं जबकि यूपी में 80, यूपी और गुजरात की क्या तुलना ? उन्होंने कहा, यूपी को गुजरात नहीं बनने देंगे। विकास करेंगे लेकिन कत्लेआम नहीं होने देंगे।
दंगाइयों से सख्ती से निपटें
मुलायम सिंह मुजफ्फरनगर हिंसा को लेकर सख्त तेवरों में नजर आए। एक तरह से उन्होंने अल्पसंख्यकों में विश्वास पैदा करने की कोशिश की।
उन्होंने माना कि सांप्रदायिक ताकतें वहां षडयंत्र में कामयाब हो गईं। अब दंगाइयों से सख्ती से निपटने की जरूरत है।
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उदाहरण दिया कि हमने अयोध्या में सख्ती से काम न लिया होता तो मस्जिद बहुत पहले गिरा दी गई होती। सरकार का डर सबसे बड़ा होता है। बातचीत की जाए लेकिन दंगा फैलाने वालों से ढिलाई न बरती जाए।
किसानों-मुसलमानों पर फोकस
आजमगढ़ रैली की तरह मुलायम सिंह के भाषण का मुख्य फोकस किसानों व मुसलमानों पर ही रहा। उन्होंने कहा, इन दोनों ने देश के विकास में सबसे ज्यादा योगदान किया है। खेती घाटे का धंधा बनती जा रही है।
किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिलता। उन्होंने आजादी के आंदोलन और उसके बाद देश के विकास, खासतौर से दस्तकारी में मुसलमानों के योगदान का जिक्र किया। अब्दुल हमीद का भी नाम लिया और एपीजे कलाम का भी।