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डॉन ने छोड़ दिया मैदान, फिर भी मोदी मुसीबत में!

Wed, 09 Apr 2014 11:33 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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मोदी को हराने के लिए कांग्रेस की चाल का एक पत्ता सटीक पड़ गया है। अब मोदी के खिलाफ काशी में उतरे डॉन मुख्तार अंसारी ने पैर पीछे खींच लिए हैं।
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कौमी एकता दल वाराणसी में नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए किसी बड़े सेक्युलर राजनीतिक दल के साझा उम्मीदवार को अपना समर्थन दे सकती है। इस बात की पूरी संभावना है कि बाहुबली मुख्तार अंसारी वहां से मोदी के खिलाफ चुनाव न लड़ें।

दरअसल मोदी को तगड़ी चुनौती देने के मकसद से कौमी एकता दल ने पिछले दिनों सभी गैरभाजपाई दलों के सामने प्रस्ताव रखा था कि सभी दल मुख्तार अंसारी को समर्थन दें या किसी साझा प्रत्याशी के लिए उनका समर्थन लें।
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दल के अध्यक्ष अफजाल अंसारी ने बताया कि ‘सेक्युलर दलों ने उनके प्रस्ताव पर गंभीरता दिखाई और काफी सकारात्मक रिस्पांस मिला। उम्मीद है दो-तीन दिन में कोई ऐसी तस्वीर सामने आएगी, जिसमें मोदी को कड़ी चुनौती मिलती दिखेगी।’
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मीटिंग में आईं दो बातें

गौरतलब है कि 27 मार्च को अफजाल अंसारी के गाजीपुर स्थित आवास पर मुख्तार को चुनाव लड़ाने के मसले पर दल के नेताओं को एक बैठक हुई थी, जिसमें दो तरह की राय सामने आई।

एक पक्ष का कहना था कि मुख्तार को हर हाल में वाराणसी से भी लड़ना चाहिए तो कुछ लोग इस बात के पक्षधर थे कि बनारस से नहीं लड़ना चाहिए।

ऐसे लोगों का तर्क था कि एक तो सेक्युलर मतदाताओं के बंटने के आधार पर मोदी को मदद करने की तोहमत लगेगी, दूसरा ध्रुवीकरण की भी स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जो हर नजर में मोदी को लाभ पहुंचाने वाली होंगी।

मुख्तार की छवि भी थी बड़ी वजह

अफजाल ने बताया कि महसूस किया गया कि मुख्तार को लड़ाने को लेकर जब दल में दो तरह की राय है तो सेक्युलर मतदाताओं और खासकर मुसलमानों में भी भ्रम की स्थिति में होगी।

ऐसे में मुख्तार को लड़ाने के फैसले पर पुनर्विचार को मजबूर होना पड़ा होगा।

आखिर में यह तय हुआ कि मुख्तार के लिए सभी दलों से इस आधार पर समर्थन मांगा जाए कि पिछले लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ उन्होंने औरों से अधिक वोट हासिल किए थे।

पर हमें एहसास था कि कुछ दल मुख्तार की छवि को लेकर नाक-भौं सिकोड़ सकते हैं। लिहाजा यह वैकल्पिक प्रस्ताव गया कि सभी दल सहमति कर साझा प्रत्याशी खड़ा करें। उस स्थिति में हम उनको समर्थन देंगे।
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दो-चार दिन में आएगा फैसला

बकौल अफजाल इस प्रस्ताव के प्रति गैरभाजपा दलों ने गंभीरता दिखाई। सकारात्मक बातचीत की।

अन्य दल आपस में भी बातचीत कर रहे हैं। पूरी उम्मीद है दो चार दिन में रास्ता निकल आएगा।

हालांकि कौमी एकता दल के एक अन्य नेता ने कहा कि केवल कांग्रेस से बात हो जाए तो भी मुनासिब होगा, क्योंकि सपा और बसपा के प्रत्याशी बुनियादी तौर से भाजपा के ही वोट काटते नजर आ रहे हैं।
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