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हजरतगंज गोलीकांड : हमलावरों का नहीं लगा सुराग, सीसीटीवी कैमरों ने भी दिया धोखा

Thu, 01 Aug 2019 11:05 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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शाहिद जाफरी - फोटो : amar ujala
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हजरतगंज में एसएसपी आवास से चंद कदमों की दूरी पर मंगलवार शाम को मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधि और हत्या के आरोपी शाहिद जाफरी व उसके भाई नामवर जाफरी को गोली मार गई थी। वारदात में पुलिस को हमलावरों केबारे में कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस को सीसीटीवी कैमरे ने भी इस वारदात के खुलासे में धोखा दे दिया।  
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वहीं वारदात के पीछे पुलिस की लापरवाही भी सामने आ रही है। खास बात यह है कि इतने सालों से वजीरगंज थाने के पास ही शाहिद खुलेआम रह रहा था लेकिन पुलिस सोती रही। उसके खिलाफ कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। अब जाकर घायल शाहिद को ट्रॉमा सेंटर में पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है, जहां से उसे इलाज के बाद जेल भेजा जाएगा।

2013 में मजलिस के दौरान युवक की हत्या करने और दंगा भड़काने के आरोपी शाहिद के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद भगोड़ा घोषित कर कुर्की का भी आदेश दे दिया। लेकिन वजीरगंज पुलिस ने शाहिद को खुलेआम घूमने की छूट दे रखी थी। कोर्ट ने यह आदेश करीब तीन माह पहले जारी किया था। लेकिन पुलिस की मेहरबानी से मुख्तार का प्रतिनिधि राजधानी की पुलिस की आंखों के सामने खुलेआम घूमता रहा। 
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जब उसे हजरतगंज में मंगलवार को गोली लगी तो वजीरगंज पुलिस को गिरफ्तारी की याद आई। उसे बुधवार को ट्रॉमा सेंटर में हिरासत में लिया गया है। अब उसका इलाज पुलिस की निगरानी में कराया जा रहा है। डॉक्टरों से राय मशविरा करने के बाद उसे जेल भेजा जाएगा। 

विधानसभा सत्र के दौरान भी सदन के बाहर रहता था

वजीरगंज पुलिस के रिकॉर्ड में शाहिद जाफरी फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी का ड्रॉमा पुलिस पिछले छह माह से करती चली आ रही है। जबकि शाहिद वजीरगंज थाने के पास ही अपने आवास पर खुलेआम रह रहा था। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का सारा कारोबार देखने वाले शाहिद पर हाथ डालने की हिम्मत वजीरगंज की पुलिस नहीं कर पा रही थी।

विधायक मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधि के रूप में विधानसभा सत्र के दौरान सदन के बाहर मौजूद रहता था। शाहिद के खिलाफ  साल 2013 में दो पक्षों में हुए बवाल में हत्या में शामिल होने का आरोप लगा था। पूरे प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने उसे दोषी करार दिया था। सीजेएम कोर्ट ने उसके खिलाफ  तीन महीने पहले गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। तत्कालीन इंस्पेक्टर ने कोर्ट को भी गुमराह कर दिया था। लेकिन वजीरगंज कोतवाली के सामने रहने वाला आरोपित पुलिस को नहीं मिल पा रहा था। खुद की गर्दन फंसती देख पुलिस ने बुधवार को ट्रॉमा सेंटर में उसे हिरासत में लिया गया। 

हमले को संदिग्ध मान रही पुलिस
एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, घायलों की जानकारी लेने पर पता चला है कि शाहिद के खिलाफ  कोर्ट से वारंट जारी है। तबियत में सुधार के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। एसएसपी ने हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगा दी हैं। वहीं पुलिस इस पूरे प्रकरण को किसी पुरानी रंजिश से जोड़कर देख रही है। पुलिस का कहना है कि आखिर इतनी व्यस्ततम सड़क पर घायलों के परिचित के अलावा कोई और प्रत्यक्षदर्शी कैसे नहीं मिला। पुलिस के कई ऐसे सवाल हैं। जिनसे घायलों को दो-चार होना पड़ेगा। पुलिस पूरी घटना को संदिग्ध मानकर जांच कर रही है।

पुलिस की मेहरबानी से करता था मौजमस्ती

 वजीरगंज इलाके में छह साल पहले युवक की गोली मारकर हत्या की थी। साथ दंगा भड़काया था। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। जांच में शाहिद दोषी पाए गया था। जांच सामने आने के बाद शाहिद के खिलाफ  सीजेएम कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। इसके बावजूद वजीरगंज कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर रहने वाला शाहिद खुलेआम घूमता रहा। कागजों में वजीरगंज पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। तत्कालीन इंस्पेक्टर ने कोर्ट को भी गुमराह कर दिया था।

कई से चल रहा शाहिद का विवाद
हजरतगंज पुलिस के मुताबिक, शाहिद प्रॉपर्टी का कारोबार करता था। कई जमीनों पर विवाद था। प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज राधारमण सिंह के मुताबिक, कई लोगों से उसकी रंजिश चल रही है। पुलिस शाहिद के विरोधियों को तलाश रही है। हालांकि दोनों भाइयों ने हमले केलिए जौनपुर केपूर्व सांसद धनंजय सिंह और सोना लूटकांड में बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह पर आरोप लगाया है। पुलिस ने शाहिद की तहरीर पर पूर्व सांसद धनंजय सिंह, आलोक सिंह और दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

शाहिद के संपत्ति की कुर्की की हो रही थी तैयारी
सीओ चौक दुर्गा प्रसाद तिवारी के मुताबिक, शाहिद के खिलाफ कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी किया। इसके बाद भी वह पुलिस के हाथ नहीं लगा। पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही थी। इसकी जानकारी होने के बाद कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित किया और संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने शाहिद की संपति कुर्क  करने की तैयारी कर रही थी।
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वारदात स्थल के आसास के सीसीटीवी कैमरे खराब

हजरतगंज पुलिस ने वारदात स्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की तो पता चला कि आसपास के इलाके के सभी कैमरे काफी दिनों से खराब पड़े हैं। जो कैमरे काम भी कर रहे थे उनमें बदमाशों की बाइक का नंबर तो दूर की बात चेहरा भी साफ नहीं दिख पाया। पुलिस अब इलाके में लगे बड़ी दुकानों व कॉम्प्लेक्स में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर निर्भर हो गई है।

बदनाम करने केलिए खुद कराया हमला : धनंजय सिंह 
जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने इस वारदात के संबंध में कहा है कि उनकी राजनैतिक छवि खराब करने के लिए साजिश रची जा रही है। इसमें मुख्तार गिरोह के लोग सक्रिय हैं। मुख्तार के प्रतिनिधि कहे जाने वाले शाहिद ने खुद ही साजिश रचकर हमला कराया है। फर्जी तरीके से मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। मामले की निष्पक्ष जांच पुलिस करे तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी।

जमीन से जुड़े सभी बिंदुओं पर हो रही जांच
पुलिस के मुताबिक, हर बिंदु पर जांच की जा रही है। पुलिस राजधानी में हो रहे प्रॉपर्टी के कारोबार में मुख्तार अंसारी केकरीबी शाहिद और पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह के करीबियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। ताकि यह साफ हो सके कि इन दोनों के बीच जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। वहीं ठेकों और राजनीतिक दखल को लेकर भी जांच की जा रही है। पुलिस पहली नजर में इसे गैंगवार से जोड़कर देख रही थी। हालांकि इसके कोई ठोस प्रमाण पुलिस के हाथ नहीं लगे हैं।
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