माफिया मुख्तार अंसारी की मुसीबत और बढ़ गई है। जेलर को धमकाने में सात साल की सजा के महज दो दिन बाद ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में मुख्तार को दोषी करार देते हुए पांच साल सश्रम कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
गैंगस्टर एक्ट के तहत 1999 में मुख्तार व उसके गैंग के खिलाफ हजरतगंज थाने में केंस दर्ज किया गया था। 23 दिसंबर, 2020 को ट्रायल कोर्ट ने मुख्तार को इस मामले में बरी कर दिया था। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने शुक्रवार को ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रायल कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि मुख्तार के खिलाफ जो गैंगचार्ट पेश की गई है, उसमें दिए गए सभी आपराधिक मुकदमों में या तो वह बरी हो चुका है या पुलिस विवेचना के उपरांत उसे क्लीन चिट दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने यह भी पाया था कि इस मामले के अन्य अभियुक्तों को गैंगस्टर के इस मुकदमे से पहले ही राहत मिल चुकी है।
इस पर राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी कि यदि यह साबित हो जाता है कि अभियुक्त एक गैंग का सदस्य है जिसके प्रति लोगों में भय व्याप्त है तो उसे गैंगस्टर एक्ट के तहत सजा दी जा सकती है। आगे कहा गया कि मूल अपराधों में यदि अभियुक्त के भय से गवाह मुकर गए और परिणामत: अभियुक्त बरी हो गया तो इसका यह आशय नहीं है कि उसे गैंगस्टर एक्ट में भी बरी ही करना होगा।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि अभियुक्त भले ही मूल अपराधों में बरी हो गया हो लेकिन यदि अभियोजन यह सिद्ध करने में सफल है कि अभियुक्त एक गैंग का सदस्य है और गैंग के दूसरे सदस्यों अथवा अकेले अपराध करता है तथा लोगों में उसका भय है तो उसे गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी किया जा सकता है। न्यायालय ने आगे कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मुख्तार के खिलाफ बहुत सी एफआईआर हैं और तमाम मामलों में पुलिस आरोप पत्र भी दाखिल कर चुकी है, उसके खिलाफ दूसरे अभियुक्त अभय सिंह आदि से मिलकर लखनऊ जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट आरके तिवारी की हत्या कराने के मामले में भी आरोप पत्र दाखिल किया गया था। न्यायालय ने कहा कि यदि एफआईआर पंजीकृत की गई है या आरोप पत्र भी दाखिल किया गया है और अभियुक्त गैंग का सदस्य है तो उसे गैंगस्टर के तहत दोष सिद्ध किया जा सकता है।
इस मामले में मुख्तार के अलावा 24 अभियुक्त थे, जिनमें सपा के वर्तमान विधायक अभय सिंह भी थे। अभय सिंह समेत दूसरे अभियुक्तों व मनोज वर्मा को पहले ही बरी किया जा चुका था। जबकि रामू द्विवेदी उर्फ संजीव, अकबर हुसैन, राम कुमार सिंह, गुड्डू सिंह, राजीव सिंह, अमित कुमार रावत, अमित राय, अनिल कुमार तिवारी, हिमांशु नेगी, मिलित गौड़ व सुरेंद्र कुमार को हाईकोर्ट बरी कर चुका है। वहीं चार अभियुक्तों की ट्रायल के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी तथा तीन अभियुक्तों को ट्रायल कोर्ट ने आरोपों से उन्मोचित कर दिया था।