सख्ती : भारी पड़ेगा प्लॉट खाली छोड़ना, वसूला जाएगा अतिरिक्त स्टांप शुल्क
आशियाना बनाने के लिए प्लॉट या जमीन खरीदने के बाद इसे लंबे समय तक खाली छोड़ना अब भारी पड़ेगा। ऐसी जमीनों को कब्जेदारी से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने स्टांप व निबंधन विभाग के साथ मिलकर खरीदारों पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू की है।
इसके लिए जमीन की रजिस्ट्री के समय ही इस पर निर्माण कार्य की मियाद भी दर्ज करवाई जाएगी। तय समय बाद प्रशासन बिना बाउंड्रीवाल खाली छोड़े भूखंडों को चिह्नित कर खरीदार से अतिरिक्त स्टांप शुल्क वसूलेगा।
इसका उद्देश्य अवैध कब्जेदारी के मामलों पर प्रभावी रोक लगाने के साथ स्टांप व निबंधन विभाग की गिरती राजस्व आय को बढ़ाना है। यह कवायद अमल में लाने को अक्तूबर से प्रस्तावित नए सर्किल रेट में ऐसे डिफॉल्टरों पर निर्माण दर पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क लगाने का प्रस्ताव शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है।
खाली जमीन व प्लॉट पर निर्माण या बाउंड्रीवाल न बनवाने पर पुन: निर्माण दर पर स्टांप शुल्क का निर्धारण कर बतौर जुर्माना इसकी वसूली होगी। प्रभारी अधिकारी व एडीएम वित्त व राजस्व अवनीश सक्सेना ने बताया कि दंडात्मक तौर पर लगने वाली निर्माण दर को न्यूनतम पांच फीसदी तक रखने की तैयारी है।
प्रस्तावित तौर पर ऐसी खाली जमीन, प्लॉट को भी अतिरिक्त स्टांप शुल्क के दायरे में लाया जाएगा, जिसमें तय मियाद बाद निर्माण कराया जाता मिलेगा। वहीं, कब्जेदारी की रोकथाम को अब तहसील स्तर पर राजस्वकर्मियों की टीम गठित कर खतौनियों का स्थलीय सत्यापन भी अनिवार्य कराने का अभियान चलेगा।
इस दौरान खतौनी में दर्ज जमीन को उनके स्वामित्व के नाम के आधार पर दुरुस्त कर इसकी फोटोयुक्त स्थलीय सत्यापन रिपोर्ट भी तैयार कराई जाएगी।