मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने 85 वर्ष की उम्र में लखनऊ के मेदांता अस्पताल में आखिरी सांस ली। बेटे आशुतोष टंडन ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर उनके निधन की जानकारी दी और लिखा कि- 'बाबूजी नहीं रहे।'
बता दें कि बीते 11 जून से ही टंडन लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती थे। उनके फेफड़े और गुर्दे ठीक से काम नहीं कर रहे थे। लगातार उनकी डायलिसिस भी की जा रही था।
अस्पताल में भर्ती होने के कुछ दिनों बाद उनकी हालत ठीक हो गई थी, लेकिन इससे पहले कि वे पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट पाते उनके स्वास्थ्य में फिर से गिरावट होने लगी।
पिछले कई दिनों से टंडन वेंटिलेटर पर थे। इससे पहले तक उन्हें आईसीयू में रखा गया था। मेदांता में विशेषज्ञों की टीम उनकी पल-पल की निगरानी कर रही थी, इसके बावजूद टंडन को नहीं बचाया जा सका।
शुरूआत से ही डॉक्टरों का कहना था कि उनकी हालत नाजुक लेकिन नियंत्रण में है। मेदांता हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने बताया था कि टंडन के ब्लड और यूरिन संबंधी जांच रिपोर्ट के पैरामीटर में सुधार भी दर्ज किया गया था।
लेकिन इसके बाद एक बार फिर उनकी हालत बिगड़ने लगी थी। डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें बुखार और पेशाब की भी परेशानी थी, जिसमें काफी सुधार हो चुका था। भर्ती करने से पहले उनकी कोरोना जांच भी की गई थी, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
जांच के दौरान उनके लीवर में भी दिक्कत पाई गई थी। सीटी गाइडेड प्रोसीजर भी किया गया था, जिसके बाद पेट में रक्त का स्राव बढ़ गया था। इसके बाद टंडन का इमरजेंसी ऑपरेशन किया गया था। इसके बाद 15 जून को उनके फेफड़े किडनी और लीवर में समस्या बढ़ गई थी।