जो सांसद और कलेक्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल की जानकारी के लिए नवंबर में हुई कार्यशाला में शामिल नहीं हो पाए, सरकार उनके लिए एक और कार्यशाला आयोजित करेगी।
केंद्र के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने इस संबंध में काम शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार चाहती है कि प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत चयनित सभी गांवों का विकास प्रधानमंत्री मोदी के विजन के मुताबिक एक जैसा हो। ये गांव मॉडल के रूप में विकसित हों।
सांसदों और कलेक्टरों की कार्यक्रम से जुड़ी जिज्ञासाएं भी शांत की जाएं ताकि ये गांव तय योजना के हिसाब से विकसित हो सकें।
इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सांसदों व जिलाधिकारियों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम तय किया था।
गत 17 नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यशाला में प्रदेश से लोकसभा और राज्यसभा के 111 सांसदों और सभी 75 जिलों के डीएम व सीडीओ को बुलाया गया था।
इनमें से मात्र 21 सांसद और 19 सांसद प्रतिनिधि पहुंचे थे। 150 डीएम व सीडीओ में से 91 मौजूद थे।
अब केंद्र सरकार ने छूटे सांसदों और कलेक्टरों के लिए अलग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने को कहा है।
ग्राम्य विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपराजिता सारंगी का पत्र आने के बाद प्रदेश सरकार ने इस संबंध में कार्रवाई शुरू कर दी है।
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान के अपर निदेशक डॉ. वरदानी ने बताया कि शासन से कार्यशाला की तिथि को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। इस महीने के अंत तक इसे कराने का प्रयास है।