छात्र-छात्राएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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प्रदेश में विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। वहीं, वोकल-लोकल-ग्लोबल की अवधारणा के आधार पर हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी और एक जिला-एक उत्पाद सहित एमएसएमई उत्पादों की बाजार क्षमता में सुधार किया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग और एमएसएमई के बीच एमओयू साइन किया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग के मानना है कि विवि व महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा देने से प्रदेश का औद्योगिक विकास होगा। एमओयू के तहत एमएसएमई विभाग हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी, ओडीओपी और अन्य एमएसएमई इकाइयों को अनुसंधान, इंटर्नशिप और परियोजनाओं के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ेगा। दोनों विभाग संयुक्त परियोजनाएं, अनुसंधान और प्रकाशन करेंगे।
संयुक्त सेमिनार और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसमें विवि व शिक्षण संस्थान व्याख्यान व तकनीकी मार्गदर्शन देंगे। वहीं, स्नातक और स्नातकोतर के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में एक परियोजना को पूरा करना होगा। इससे उन्हें उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कारीगरों व शिल्पकारों की क्षमता संवर्धन अल्पकालिक व्यावसायिक पाठ्यक्रम कराया जाएगा। विवि उद्योग संगठनों और प्रतिष्ठित कंपनियों के सीएसआर फंड का उपयोग कर नवाचार के लिए सहयोग करेंगे।