रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे अवैध अस्पतालों में मरीजों को जान गंवानी पड़ रही है। बछरावां के एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद भी उसे गंभीर बताकर रेफर करने का आरोप परिजनों ने लगाया है। मामले में बृहस्पतिवार को शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने सीएमओ को जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
स्टेशन रोड चंद्रिका नगर बछरावां निवासी शिवम जायसवाल ने डीएम को शिकायतीपत्र दिया है। इसमें बताया कि पत्नी नेहा का प्रसव कराने के लिए बीती 25 अक्तूबर को बछरावां स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती के समय 11500 हजार रुपये जमा कराए गए। खून की जांच के नाम पर 4500 रुपये अलग से जमा कराए गए। प्रसव के बाद दो यूनिट ब्लड के लिए 20 हजार रुपये वसूले गए। डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही से 26 अक्तूबर को प्रसूता की मौत हो गई। इस बात को छिपाते हुए अस्पताल प्रशासन ने मरीज की हालत सीरियस बताते हुए सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए कहा। परिजन जब प्रसूता को ले जाने लगे तो पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है।
शिवम ने आरोप लगाया कि नवजात का जन्म प्रमाणपत्र, टीकाकरण व डिलिवरी के समय से संबंधित कागजात मांगने पर हॉस्पिटल के संचालक ने गाली-गलौज कर जान से मरने की धमकी दी। इस पर डायल-112 पुलिस को बुलाकर तहरीर दी गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, लेकिन तहरीर देने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। डीएम हर्षिता माथुर का कहना है कि सीएमओ को जांच के आदेश दिए गए हैं।