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लखनऊ में मां बेटे ने की थी ISIS मॉड्यूल के संदिग्धों की मदद, सोना बेचकर लिया था कैश

Thu, 27 Dec 2018 12:13 PM IST
Amit Saini न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से किए गए खुलासे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार पकड़े गए संदिग्धों में से दो असलहों का इंतजाम करने के लिए सोना बेचने लखनऊ आए थे। एनआईए ने सिटी स्टेशन के करीब एक घर में महिला से पूछताछ की है।

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बताया जा रहा है कि महिला का बेटा फेसबुक के जरिए कुछ लोगों से जुड़ा था। फेसबुक चैट के दौरान ही एक युवक ने घर में बीमारी का बहाना बनाकर उसके पास रखा सोना बिकवाने के लिए मदद मांगी थी। इसके बाद दो युवक लखनऊ आए थे और महिला ने उन्हें पुराने लखनऊ में चौक के अकबरी गेट स्थित एक ज्वैलरी की दुकान पर ले जाकर उसका सौदा कराया था।

एटीएस और एनआईए की टीम ने उन दोनों स्थानों पर छापेमारी कर संबंधित लोगों से पूछताछ की है और लैपटॉप व मोबाइल जब्त किए हैं। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि लखनऊ का युवक, महिला और दुकानदार यह सब जानबूझ कर रहे थे या फिर अनजाने में। एजेंसी ने लखनऊ में दो स्थानों पर छापेमारी की थी।

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अमरोहा में तैयार किया जा रहा था विस्फोटक

मास्टर माइंड अमरोहा निवासी मो. सुहैल आईएसआईएस के संगठन ‘हरकत उल हर्ब ए इस्लाम’ का अमीर (मुखिया) बताया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि अमरोहा में विस्फोटक तैयार किया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक सुहैल ने सहारनपुर के देवबंद से मौलवी का कोर्स किया है। इसके बाद वह दिल्ली चला गया था जहां से उसने मुफ्ती का कोर्स किया। लगभग सात-आठ महीने पहले उसने फेसबुक पर जेहाद से संबंधित पेज को फॉलो करना शुरू कर दिया। इसी दौरान एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई और फिर उसे गुमराह किया जाने लगा। उसे आईएसआईएस से संबंधित साहित्य भेजे गए।

पूरी तरह से अपनी बातों में लेने के बाद हैंडलर ने उसे बम बनाने की विधि भी भेजी। इसके बाद सामान जुटाकर उसने बम बनाने शुरू कर दिए। जिसमें टाइम बम और देशी रॉकेट लॉन्चर तक शामिल था। बम बनाने के लिए सामान मुहैया कराने में सुहैल का साथ सईद और रईस ने दिया। सईद और रईस दोनों सगे भाई हैं। इसमें एक वेल्डिंग का काम करता है तो दूसरा रिक्शा चलाता है। इन दोनों को सुहैल ने जेहाद के लिए प्रोत्साहित किया।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इन दोनों का इस्तेमाल फिदाइन हमले के लिए किया जाना था। मो. इरशाद और शाकिब को भी इसी ग्रुप से जोड़ लिया गया था और इन्हें जेहाद से संबंधित साहित्य उपलब्ध कराए गए थे। यह ग्रुप पहले फेसबुक के जरिए और बाद में व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए एक दूसरे के संपर्क में रहता था।
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पहली बार एटीएस की स्पॉट टीम लगी ऑपरेशन में

इस मामले में यूपी एटीएस की स्पॉट टीम पहली बार किसी ऑपरेशन में शामिल हुई। आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि गिरोह के लोगों को पकड़ने के लिए एटीएस के स्पॉट टीम से 44 लोगों को लगाया गया था। इस टीम को लीड कर रहे एसएसपी एटीएस विनोद कुमार सिंह और अतुल यादव की टीम ने अलग अलग स्थानों पर छापेमारी कर कार्रवाई की।

एटीएस भी करेगी पूछताछ
इस मामले में पकड़े गए लोगों से यूपी एटीएस भी पूछताछ करेगी। एटीएस यह जानने की कोशिश करेगी कि कहीं कुंभ के दौरान यह लोग किसी वारदात को अंजाम देने की साजिश तो नहीं रच रहे थे? फिलहाल शुरुआती पूछताछ में इसके बारे में संदिग्धों ने नहीं बताया है।
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