लखनऊ। एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. पीके माहेश्वरी के मुताबिक, अनियमित जीवनशैली और खराब खानपान फालिज (लकवा) की बड़ी वजह बनते हैं। यही वजह है कि युवाओं को आमतौर पर फालिज का अटैक छुट्टी के अगले दिन आता है। प्रो. पीके माहेश्वरी ने इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन (आईएसए) के 18वें वार्षिक सम्मेलन में ये बातें कहीं। सम्मेलन कानपुर रोड स्थित होटल में हुआ।
प्रो. पीके माहेश्वरी ने बताया कि आमतौर पर युवाओं में छुट्टी का दिन ज्यादा अनियमित तरीके से बिताने की प्रवृत्ति देखी गई है। इसकी वजह से ही उन्हें छुट्टी के अगले दिन अटैक पड़ता है। यह देखना भी अहम है कि फालिज के सबसे ज्यादा मामले सुबह छह से दोपहर 12 बजे के बीच होते हैं।
प्रो. पीके माहेश्वरी के मुताबिक, स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर का संबंध भी देखा गया है। सामान्य तौर पर शाम के वक्त बीपी में 10 फीसदी की कमी रहती है, लेकिन स्ट्रोक वाले मरीजों में यह नहीं देखा जाता। उच्च बीपी एक जाना-माना स्ट्रोक जोखिम कारक है, लेकिन यह निर्धारित करने के लिए आगे के शोध की आवश्यकता है कि स्ट्रोक की घटना से पहले या बाद में बीपी में उतार-चढ़ाव होता है या नहीं। इस मौके पर आईएसए अध्यक्ष डॉ. सूर्या और सचिव डॉ. अरविंद शर्मा के साथ ही देश भर से आए हुए विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
ऐसे कम करें स्ट्रोक का जोखिम
स्ट्रोक के जोखिम कम करने के लिए प्रकाश के संपर्क को नियंत्रित करें। शारीरिक गतिविधि बनाए रखें और नियमित नींद पैटर्न सुनिश्चित करें। न सिर्फ पर्याप्त नींद लेनी है, बल्कि उसे नियमित भी रखना है। सही खान-पान और शारीरिक व्यायाम भी स्ट्रोक का खतरा कम करता है।