प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को निकालने के लिए मुख्यमंत्री ने भले ही आदेश दे दिए हों, लेकिन पुलिस को इसे अमली जामा पहनाने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
इंटेलीजेंस रिपोर्ट के मुताबिक अब तक प्रदेश में 304 रोहिंग्या मुसलमान चिन्ह्ति किए गए हैं। इसमें अधिकतर सहारनपुर में रह रहे हैं। दूसरी तरफ, बांग्लादेशियों की पहचान में भी पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।
सोमवार को एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार ने कहा कि बांग्लादेशियों को प्रदेश से बाहर करने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है और सभी जिलों से आंकड़े मांगे गए हैं।
इन आंकड़ों को तीन श्रेणियों में रखा जा रहा है। पहले, बिना आईडी कार्ड वाले बांग्लादेशी, दूसरे ऐसे बंग्लादेशी जो खुद को असम या देश के किसी अन्य राज्य का निवासी बताते हैं और तीसरे वे जिनकी उसी पते पर आईडी बन चुकी है, जहां वे रह रहे हैं। आंकड़े आने के बाद आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
पुलिस अफसरों का कहना है कि दो दशक से अधिक समय से प्रदेश में रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान आसान नहीं है। पुलिस को जड़ तक पहुंचने के लिए एक-एक बांग्लादेशी के फैमिली ट्री पता करनी होगी।
मसलन, किसी बांग्लादेशी युवक के पास यूपी की आईडी है तो उसके पिता की आईडी या रिहाइश के बारे में जानकारी हासिल करनी होगी। वहीं, एडीजी कानून-व्यवस्था ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में कोर्ट के निर्णयों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।