तीन चरणों की काउंसलिंग और सीधे दाखिले के बाद भी प्रदेश में पॉलीटेक्निक की 1,04,800 सीटें खाली रह गई हैं। अब इन सीटों पर दाखिले की कोई उम्मीद नहीं बची है।
बहुत सारी सीटें लॉक करने के बाद भी छात्र कॉलेजों में रिपोर्टिंग करने नहीं पहुंचे और उनकी सीटें निरस्त कर दी गईं। इनमें प्राइवेट के अलावा राजकीय कॉलेजों की सीटें भी शामिल हैं।
पॉलीटेक्निक में पहले मुख्य स्तर पर तीन चरणों की काउंसलिंग हुई। इसके बाद स्पॉट काउंसलिंग कराई गई। इसके बाद प्रदेश के 1150 निजी संस्थानों 2,05,179 सीटों पर सीधे दाखिला लेने के निर्देश दिए गए। बावजूद इसके ऐसे संस्थानों में 1,02,000 सीटें खाली रह गई हैं।
वहीं फॉर्मेसी की करीब सभी सीटें फुल हो गई हैं। इंजीनियरिंग डिप्लोमा की करीब 75 हजार सीटें रिक्त रह गई हैं। इसके अलावा प्रदेश के 115 राजकीय पॉलीटेक्निक में 2800 सीटें खाली रह गई हैं, जिसमें प्रमुख रूप से पेंट टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग, लेदर टेक्नोलॉजी, फूड टेक्नोलॉजी आदि की सीटें शामिल हैं। वहीं 19 सहायता प्राप्त पॉलीटेक्निक की सभी सीटें फुल हो गई हैं।