सूबे में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना (एनएचआरएम) के तहत हुआ घोटाला, यहां सीबीआई की अब तक की सबसे बड़ी जांच बनी हुई है। इसमें बसपा सरकार के काबीना मंत्रियों से लेकर उच्च प्रशासनिक की मिलीभगत सामने आ चुकी है। खुलेआम नियमों की अनदेखी और मनमाना काम किया गया। इतना ही नहीं बगैर काम भुगतान भी दिया गया।
अपने लोगों के ठेके दिए और काम करने के लिए अग्रिम भुगतान भी। चुनिंदा फर्मों व कंपनियों से अधोमानक दवाएं और उपकरण खरीदे गए और बाजार दर से आठ गुना अधिक भुगतान किया गया। हर काम हुआ, मगर कमीशन के साथ।
शिकायत हुई तो जांच भी लेकिन जो तथ्य सामने आए, उसने सिर्फ सियासी ही नहीं प्रशासनिक हलके में सबको सकते में ला दिया। घोटाला एक-दो करोड़ का नहीं बल्कि साढ़े पांच हजार करोड़ से अधिक का निकला। अभी इसके और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
सीबीआई इस मामले में अब तक 76 से अधिक मुकदमे दर्ज कर चुकी है। घोटाले की जांच कर रहे अधिकारियों ने माना था कि घोटाला कई वर्षों से चल रहा था। पर, वर्ष 2010 व 11 में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी।
दो सीएमओ व एक डिप्टी सीएमओ की हत्या
एनआरएचएम घोटाला मामले में लखनऊ में परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डॉ. विनोद आर्य को अक्तूबर 2010 में व डॉ बीपी सिंह को अप्रैल 2011 में सरेआम गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। यही नहीं घोटाले के आरोप में जेल भेजे गए डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान को जून 2011 में की लखनऊ जिला जेल में हत्या कर दी गई।
अफसरों ने इसे आत्महत्या बताने की कोशिश की थी। वहीं, सीबीआई जांच के दौरान खीरी में तैनात चिकित्सा विभाग के एक वरिष्ठ लिपिक महेंद्र शर्मा की हत्या कर दी गई थी। इसे भी आत्महत्या बताया गया। एक परियोजना प्रबंधक समेत दो ने आत्महत्या भी की तो एक ठेकेदार ने ट्रेन के सामने आकर जान देने का प्रयास किया।
बाबूसिंह कुशवाहा समेत कई आज भी जेल में
सीबीआई ने अपनी जांच में बसपा सरकार के तत्कालीन काबीना मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व विधायक आरपी जायसवाल को मार्च 2012 में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ला को उसी साल मई को गिरफ्तार किया गया।
इससे पहले जनवरी 2012 में पूर्व डीजी हेल्थ एसपी राम, यूपीएसआईसी के एमडी एके वाजपेयी, दवा के बड़े व्यापारी सौरभ जैन गिरफ्तार किए गए थे।
इसके अलावा सीबीआई ने कई इंजीनियर, परियोजना प्रबंधक, चिकित्सा अधिकारी आदि को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। बाबू सिंह कुशवाहा आज भी जेल में हैं, जबकि प्रमुख सचिव व पूर्व विधायक व कई अन्य को जमानत मिल चुकी है।