अवैध निर्माण के शमन के लिए सरकार ने छह महीने के लिए भले ही नई शमन नीति लागू कर दी हो, लेकिन प्रदेश में हजारों ऐसे अवैध निर्माण हैं जिनको इस नीति का लाभ नहीं मिल पाएगा। नई नीति के मानकों के मुताबिक इन अवैध निर्माणों को वैध नहीं किया जा सकेगा। नई नीति में कई ऐसे मानक हैं जो तमाम अवैध निर्माणों के शमन में आड़े आएंगे। राजधानी समेत विभिन्न शहरों में ऐसे अवैध निर्माणों की संख्या 45 हजार से भी अधिक है।
एक अनुमान के मुताबिक 20 हजार से अधिक अवैध निर्माण सिर्फ लखनऊ में ही चिह्नित हैं। वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद व गोरखपुर जैसे शहरों में भी अनाधिकृत निर्माणों की संख्या हजारों में है। इसी के मद्देनजर सरकार ने 6 महीने के लिए नई ‘शमन नीति-2020’ लागू किया है। पहले की नीतियों की तुलना में नई नीति में काफी रियायत दी गई है।
नीति के मानक को भी काफी सरल किया गया है। ताकि अधिक से अधिक अवैध निर्माणों को नियमित किया जा सके। लेकिन सूत्रों का कहना है कि नई नीति में काफी रियायत होने के बावजूद 50 प्रतिशत अवैध निर्माणों का शमन नहीं हो सकेगा। मुख्य नगर नियोजन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल नई नीति के मानक की परिधि में आने वाले अवैध निर्माणों को नियमित करने की कार्यवाही होगी। इसके बाद उन निर्माणों का आंकड़ा तैयार किया जाएगा, जो शमन नीति के मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं। बाद में नीति से छूटे निर्माणों के बारे रणनीति तैयार की जाएगी।
ऐसे अवैध निर्माणों में होगी दिक्कत
जिन अवैध निर्माणों का शमन नहीं हो पाएगा वे ऐसे निर्माण हैं जो भू-उपयोग के विपरीत बने हैं। बहुत से ऐसे अवैध निर्माण हैं जो आवासीय जमीन पर व्यावसायिक या कार्यालय के रूप में बने हैं। इसी तरह बहुत से आवासीय जमीन पर अपार्टमेंट, क्लीनिक, बारात घर, होटल मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी आदि बनाए गए हैं। ऐसे निर्माणों को नियमित करने के संबंध में नई नीति में कोई प्रावधान नहीं है। लिहाजा ऐसे अवैध निर्माणों को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण ही एकमात्र विकल्प बचा है।