राजधानी लखनऊ इन दिनों कुत्तों के साये में है। यहां हर गली में खतरा और हर मोड़ पर डर का माहौल है। हर दिन 200 लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
राजधानी लखनऊ में कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। हर रोज करीब 200 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में रेबीज रोधी इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में इसके लिए 350 से 500 रुपये तक लिए जाते हैं। बलरामपुर अस्पताल में प्रतिदिन 60-70 नए मरीज आते हैं।
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कुल मिलाकर 250-300 मरीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। इनमें करीब 30 फीसदी बच्चे होते हैं। इंजेक्शन लगवाने वालों में ज्यादातर पुराने लखनऊ चौक, चौपटिया, नक्खास, मौलवीगंज, सआदतगंज, ऐशबाग, कैसरबाग, रकाबगंज, ठाकुरगंज, सदर, डालीगंज आदि इलाके के लोग होते हैं।
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केजीएमयू के डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि 72 घंटे के भीतर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना जरूरी है। इस अवधि के बाद टीका लगवाने का कोई लाभ नहीं होता। रेबीज वायरस से व्यक्ति का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। इससे व्यक्ति या तो जल्द कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है। कभी-कभी उसे पानी से भी डर लगता है।
लखनऊ की सड़कों पर आवार कुत्ते।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
बताएं, छिपाएं नहीं
गाजियाबाद में हुई घटना में पता चला कि एक बच्चे को कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसने घर पर नहीं बताया। बाद में रेबीज से उसकी मौत हो गई। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चे को जागरूक करना चाहिए कि अगर कुत्ता काटता है तो तुरंत बताएं।
लक्षण
पानी से डर लगना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता, भ्रम की स्थिति, खाना-पानी निगलने में कठिनाई, लार निकलना, पानी से डर लगना, अनिद्रा, लकवा मार जाना।
क्या करें
काटे हुए स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डेटॉल से साफ करें। जितना जल्दी हो सके वैक्सीन एआरवी का टीका लगवाएं।
क्या न करें
काटे हुए स्थान पर मिर्च न बांधे। घाव ज्यादा होने पर भी उस पर टांके न लगवाएं।