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जितना ज्यादा बर्बाद करेंगे पानी उतना ज्यादा लगेगा टैक्स

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शहर में वाटर मीटर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए शासन ने पेयजल खर्च के आधार पर वाटर टैक्स की दरें (जल मूल्य) तय कर दी हैं। शहरवासियों को खर्च के आधार पर वाटर टैक्स देना होगा।
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अभी आवासीय भवन स्वामियों से एक समान जल मूल्य लिया जाता है चाहें वह भवन स्वामी कम पानी खर्च करता हो या ज्यादा। शासन द्वारा तय की गईं दरों में यह व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

इसमें पानी की खपत के आधार पर आवासीय भवनों को सात श्रेणियों में बांटा गया है और उसी आधार पर मूल्य तय किया गया है। यह दरें वाटर मीटर लगने के बाद लागू की जाएंगी।
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शासन ने अभी वाटर मीटर लगाने का आदेश भले ही जारी नहीं किया है मगर इसकी तैयारी शुरू हो गई है। वाटर मीटर लगने के बाद किस आधार पर टैक्स वसूल किया जाएगा इसको लेकर दरें तय कर दी गई हैं।
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इस हिसाब से वसूला जाएगा वाटर टैक्स

इसकी रेट लिस्ट भी जलकल महाप्रबंधक को नगर निगम सदन और कार्यकारिणी से मंजूरी दिलाने के लिए भेज दी गई है। सदन और कार्यकारिणी की मंजूरी के बाद दरें लागू कर दी जाएंगी।

मीटर लगे न होने के कारण जलकल विभाग उपभोक्ताओं से अभी गृहकर निर्धारण के आधार पर जल कर वसूल करता है। भवन कर की एआरवी (एनुअल रेंटल वैल्यू) पर 12.5 प्रतिशत वाटर टैक्स वसूल किया जाता है। इसके अलावा जलकल विभाग ने एआरवी के आधार पर टैक्स के स्लैब भी बना रखे हैं। लेकिन टैक्स उसी के तहत लिया जाता है जिसमें अधिक टैक्स बनता है।

वाटर मीटर लगने के बाद किस हिसाब से वाटर टैक्स वसूल किया जाएगा। इसको लेकर दरें तय कर शासन को प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव को नगर निगम सदन और कार्यकारिणी में पास करने के लिए रखा जाएगा। यहां से पास होने के बाद शासन को जानकारी दी जाएगी। उसके बाद जैसा आदेश होगा उसे लागू किया जाएगा।
राजीव वाजपेयी, महाप्रबंधक जलकल
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