मेरठ में दो दिन पहले हुए हिंसक संघर्ष को अधिकारियों ने भले ही मौके पर नियंत्रित करने का दावा किया है, वहां के हालात अभी सामान्य नहीं हो सके हैं।
यही वजह है कि मेरठ में पीएसी की छह कंपनी और भेजी गई है। मेरठ हिंसा के मामले में शासन ने डीआईजी मेरठ से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मेरठ मामले में सरकार का पक्ष रख रहे आईजी एसटीएफ आशीष गुप्ता व गृह सचिव संजय प्रसाद ने बताया कि इस प्रकरण में मेरठ के आईजी सत्यनारायण से रिपोर्ट मांगी गई है।
डीआईजी घटना के कारण और सामने आई कमियों के साथ ही बेहतर कार्रवाई के लिए किए गए उपायों के बारे में रिपोर्ट देंगे।
जमकर हुई थी फायरिंग
मेरठ की इस हिंसा में जमकर फायरिंग हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के तीन-तीन यानि कुल छह लोग घायल हुए थे। चर्चा इस बात की भी हुई थी कि जहां यह हिंसा हुई, वहां पहले सतर्कता के नजरिए से पिकेट लगती थी, जिसे पिछले दिनों हटा दिया गया था।
इस चूक को लेकर प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्त व डीजीपी एएल बनर्जी, दोनों ही अधिकारियों द्वारा टिप्पणी की जा चुकी है।
लेकिन आईजी एसटीएफ व गृह सचिव ने अपने वरिष्ठों द्वारा मेरठ मामले में की गई किसी तरह की टिप्पणी के बारे में जानकारी होने से साफ मना कर दिया।
आईजी एसटीएफ ने कहा कि चूंकि अधिकारियों द्वारा दिए गए किसी वक्तव्य की मुझे जानकारी नहीं है, लिहाजा मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। उधर, मेरठ में पीएसी की छह कंपनी और तैनात करे जाने की जानकारी है।
इससे पहले वहां हिंसा के बाद सात कंपनी पीएसी तैनात की गई थी। मौजूदा समय में मेरठ में कुल 13 कंपनी पीएसी तैनात है। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात है।
असलहे तो पकड़े नहीं जा सकते
मेरठ में हिंसा पर आमादा दोनों पक्षों द्वारा खुले आम असलहों को तानने और फायरिंग किए जाने के मामले में पूछे जाने पर आईजी एसटीएफ ने कहा कि वहां नाजायज असलहों को इस्तेमाल किया गया।
जब उनसे यह पूछा गया कि प्रदेश पुलिस पिछले दो महीनों से हर जिले में नाजायज असलहों, विस्फोटकों आदि की बरामदगी के लिए सघन अभियान चला रही थी, तब मेरठ में इतने सारे असलहे कैसे आ गए।
आईजी का कहना था कि अभियान जरूर चल रहा है लेकिन सारे नाजायज असलहे पकड़ लिए जाएं यह संभव नहीं है।