लखनऊ। रमजान के मुकद्दस महीने में अल्लाह की रहमत हासिल करने और अपने गुनाहों की माफी के लिए पूरे महीने रोजे रखकर इबादत के बाद अब रोजेदारों को ईद का इंतजार है। ईद का चांद देखने की उलमा की अपील के बाद गुरुवार शाम को मगरिब की नमाज के बाद रोजेदारों की निगाहें चांद के दीदार को बेकरार रहीं। हर कोई आसमान में टकटकी लगाए चांद की एक झलक पाने की जद्दोजहद में दिखा।
मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष एवं ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास और मौलाना अबुल इरफान मियां फिरंगी महली ने शाम को ईद का चांद न दिखने का एलान किया। इदारा शरिया फरंगी महल के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली ने भी ईद का चांद न होने का एलान किया। ईद का चांद न होने पर रोजेदार मायूस जरूर हुए, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी ज्यादा थी कि उन्हें एक दिन और इबादत करने और रोजा रखने का मौका मिला है। ईद शुक्रवार को मनाई जाएगी।
उलमा की अपील, सादगी से मनाएं त्योहार
लखनऊ। रमजान के मुकद्दस महीने में इबादतें पूरी करने के बाद ईद की तैयारी कर रहे मुसलमानों से उलमा ने सादगी ईद से मनाने की अपील की है। उलमा ने कहा कि कोरोना काल में नए कपड़ों पर खर्च करने के बजाय गरीबों की करें। उन्होंने ईद के बजट का 50 फीसदी हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को देने का आह्वान किया है।
ईद उल फित्र का दिन खुदा पाक ने रमजान के रोजों को पूरा करने पर मुसलमानों को इनाम के तौर पर दिया है। मुसलमान इस दिन अपने रब का शुक्र अदा करने के लिए दो रकात नमाज ईद उल फित्र बहुत बड़ी जमाअत के साथ अदा करते हैं और खुशियां मनाते हैं। रिश्तेदारों, दोस्तों, पड़ोसियों व वतन के दूसरे भाईयों से गले मिलते हैं। लेकिन इस बार भी कोरोना की लहर है। इसलिए इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने ईद को लेकर एडवाइजरी जारी की है। इसमें अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सादगी से त्योहार मनाने को कहा है। मुसलमानों से अपील की है कि नए कपड़ेे न सिलवा कर जो सबसे बेहतर कपड़ा हो उसे पहन कर नमाज अदा करें। ईद के बजट का 50 प्रतिशत गरीबों व जरूरतमंदों में बांटे। ईद के दिन गुस्ल करना, अच्छे कपड़े पहनना, खुशबू तेल, सुर्मा लगाना और खजूर खाना सुन्नत है, इसलिए इन चीजों का एहतिमाम करें। उन्होंने कहा किनमाज से पहले गरीबों को सद्का जरूर दें। यह इस साल एक आदमी का कम से कम 50 रुपये तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जो 5 लोग मस्जिद में रहते हैं, वही मस्जिद में ईद की नमजा अदा करें। जिस घर में 4 लोग या इससे अधिक लोग हों वह ईद की जमाअत घर पर पढ़ें। अगर किसी घर में 4 लोगों से कम हों तो वह 4 रकआत नफल नमाज-ए-चाश्त अकेले अकेले पढे़ं। ईद की नमाज वाजिब है। इसे 6 जायद तकबीरों के साथ अदा करें। ईद की नमाज के बाद खुतबा पढ़ना सुन्नत है। यदि किसी को खुतबा याद न हो और खुतबे किताब भी न हो तो वह पहले खुतबे में सूरह फातिहा और सूरह अखलास पढ़े और दूसरे खुतबे में दुरूद शरीफ के साथ कोई दुआ अरबी में पढ़े। मौलाना ने कहा कि अपने अपने घर में रहें, किसी से मिलने न जाएं। सबको फोन पर ईद की मुबारकबाद दें।
वहीं इदारा शरइया फिरंगी महल के महासचिव मौलाना अफ्फान मियां फिरंगी महली ने भी ईद सादगी से मनाने की अपील करते हुए जकात अदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अल्लाह सखावत करने वाले का दोस्त बन जाता है। लिहाजा रमजान के महीने में हर नेकी का बदला 70 गुना मिलता है। इसमें जकात या दूसरी मदद देकर ज्यादा से ज्यादा सवाब हासिल करें। मौलाना अफ्फान ने कहा कि ईद के दिन या ईद से पहले साहिबे निसाब के ऊपर अपने और अपने घर के हर व्यक्ति की तरफ से 50 रुपये फितरा दें। कोविड 19 की गाइडलाइन पर अमल जरूर करें। खासतौर से औरतें और बच्चों को बाजार में इकट्ठा होने के लिए मना करें। साफ-सुथरे और बेहतर पुराने कपड़े पहनकर ही ईद की खुशियां मनाएं। बचे पैसे से गरीब व बीमारों की मदद करें। मुल्क में शांति व कोरोना से निजात की दुआ मांगें।
इमामे जुमा मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने ईद उल-फित्र के पेशे नजर लोगों से अपील की कि कोरोना को देखते हुए सादगी से ईद मनाएं। ईद के दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें। ईद की नमाज घर पर पढ़ें। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने भी ईद सादगी से मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नए कपड़ों पर खर्च के बजाय गरीबों की मदद करें। ईद की नमाज घरों में अदा करें।