कोविड-19 के कहर के बीच 20 अगस्त से शुरू हो रहे विधानमंडल के मानसून सत्र में कोरोना, कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों और कामगारों की समस्याएं प्रमुखता से उठने की संभावना है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सरकार की तरफ से भले ही तमाम दावे होते रहे हों, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश जरूर करेगा।
कानून-व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष सरकार पर हमलावर रहेगा। कानपुर के बिकरू कांड समेत प्रदेश में घटी आपराधिक घटनाओं का मुद्दा विपक्ष जोर-शोर से उठाएगा। शारीरिक दूरी के साथ शुरू होने वाले इस सत्र में अनुपूरक बजट भी लाए जाने की संभावना हैं। श्रमिकों व कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर भी सरकार विपक्ष के निशाने पर रहेगी।
दरअसल, कोरोना से निपटने के लिए सरकार के युद्ध स्तर पर प्रयासों के बावजूद मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी और उनकी भर्ती को लेकर समय-समय पर कई समस्याएं सार्वजनिक होती रही हैं। कर्मचारी संगठनों की तरफ से कोरोना मरीजों के इलाज में लगे कर्मचारियों के संक्रमित होने और उनका ठीक से इलाज न हो पाने की शिकायतें भी उठाई जाती रही हैं।
कर्मचारियों को पीपीई किट और अन्य सुरक्षा उपकरण मुहैया न कराने की शिकायतें भी कर्मचारी नेता उठाते रहे हैं। विपक्ष ये मुद्दे उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार को विपक्ष के आक्रामक रुख का सामना करना पड़ेगा। कानपुर के बिकरू कांड, संजीत यादव का अपहरण और हत्या, गोरखपुर में एक बालक के अपहरण के बाद हत्या समेत अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर सरकार को घेरने में विपक्ष कोई कसर बाकी नहीं रखेगा।
इन मुद्दों के भी उठने की संभावना
कर्मचारी संगठन भत्तों की कटौती के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे हैं। कोरोना के चलते उन्होंने कोई बड़ा आंदोलन तो नहीं किया है लेकिन भत्तों की कटौती पर लगातार नाराजगी जताते रहे हैं। जाहिर है कि विपक्ष कर्मचारियों की इस नाराजगी को भी सदन में सरकार के खिलाफ मुद्दा बनाएगा।
संविदा कर्मचारियों की छंटनी और श्रम कानूनों में ढील जैसे मुद्दों को भी विपक्ष सरकार के खिलाफ हथियार बना सकता है। बांधों के टूटने व कटने की घटनाओं पर भी सरकार को घेरने की कोशिश के संकेत मिल रहे हैं।
विपक्ष के आक्रमण की धार कुंद करने की तैयारी
सत्र के दौरान सरकार की भी कोशिश तर्कों व तथ्यों से विपक्ष की बोलती बंद करने की होगी। वह कोरोना संकटकाल में गरीबों को मुफ्त अनाज, आर्थिक मदद के साथ प्रवासी श्रमिकों की रोजी-रोटी के लिए किए कामों का उल्लेख करते हुए विपक्ष के आक्रमण की धार कुंद करने की कोशिश करेगी।
सरकार ने लॉकडाउन के दौरान नौकरी से हाथ धो बैठे कामगारों और श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए श्रमिक आयोग का गठन किया है। प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की भी रूपरेखा बनाई है। इसके लिए बजट की जरूरत होगी। इसलिए सरकार इस सत्र में अनुपूरक बजट भी ला सकती है। सत्र में कई नए विधेयक भी पारित कराए जाने के आसार हैं।