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अनोखी खबरः लंगूर बना रेलवे अफसर, सेलरी लाखों में

Thu, 13 Nov 2014 09:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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दिन में छह घंटे की ड्यूटी, आधा घंटा का लंच और फिर डेढ़ घंटे आराम। नौकरी के दौरान अपने क्षेत्र की विशेष निगरानी और सालाना वेतन का पैकेज 1.41 लाख रुपये।
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काम के हर घंटे का पूरा हिसाब-किताब वह भी एक वरिष्ठ राजपत्रित रेलवे अधिकारी की निगरानी में। रोजाना अपनी उपस्थिति एक रजिस्टर पर दर्ज कराने के बाद वेतन का अंतिम हिसाब तैयार होता है।

एक दिन उपस्थिति रजिस्टर में लाल निशान लगा तो समझो 392 रुपये का मेहनताना कट गया। यह वेतन पैकेज और तामझाम किसी कॉरपोरेट सेक्टर के कर्मचारी के लिए नहीं बल्कि बंदरों को भगाने के लिए चारबाग स्टेशन पर तैनात हुए लंगूर पवन का है।
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चारबाग स्टेशन पर पिछले एक साल से बंदरों को भगाने के लिए तैनात हुए लंगूर पवन का कार्यकाल पिछले माह खत्म हो गया था। रेलवे ने दोबारा पवन को एक साल के अनुबंध पर तैनात किया है।

हर माह उसे 11,750 रुपये वेतन मिलेंगे जो कि पिछले साल से 10 फीसदी यानी 1175 रुपये ज्यादा है। पवन इससे पहले डीजल शेड और आलमबाग के कई सरकारी प्रतिष्ठानों में अपनी सेवाएं दे चुका है।
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लंगूर का इसलिए हुआ प्रमोशन

पवन मुरादाबाद और जालंधर में भी बंदरों को भगाने के लिए तैनात किया गया था। उसका साथी ‘दबंग’ एक साल से छावनी में तैनात है।

वरिष्ठ स्टेशन प्रबंधक राजपत्रित एके दोहरे का कहना है कि पिछले साल पवन की सेवा समाप्त हो गई थी जिसे अब फिर से बढ़ा दिया गया है।

पवन को पिछले साल ही चारबाग स्टेशन पर बंदरों को भगाने के लिए लगाया गया था। पवन की मौजूदगी के बाद स्टेशन से बंदर अपना इलाका छोड़कर भागने लगे।

हालांकि शुरू में पवन और बंदरों के बीच सैलून साइडिंग की तरफ गैंगवार भी हुई। सभी बंदरों ने इकट्ठा होकर पवन पर हमला करने का प्रयास भी किया लेकिन वह पीछे नहीं हटा।

पवन के साहस के चलते दर्जनों की संख्या में मौजूद बंदर चारबाग से लोको वर्कशॉप और रेलवे स्टेडियम की ओर भाग निकले। अच्छे काम के कारण पवन को इस साल 10 फीसदी के इंक्रीमेंट के साथ एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है।
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