राज्य सरकार ने 157 संस्कृत विद्यालयों को तीन महीने का वक्त देकर सशर्त अनुदान बहाल कर दिया है।
राज्य सरकार ने 157 संस्कृत विद्यालयों को सशर्त अनुदान बहाल कर दिया है। यह शर्त रखा गया है कि विद्यालय तीन महीने के भीतर तमाम मानक पूरे करेंगे।
इस संबंध में प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा मनोज कुमार सिंह ने शासनादेश जारी कर दिया।
राज्य सरकार निजी क्षेत्रों में संचालित होने वाले संस्कृत विद्यालयों व महाविद्यालयों को अनुदान पर लेती है।
साथ ही वहां एक प्रधानाचार्य के साथ पांच शिक्षक व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रखने के एवज में वेतन देती है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मानक पूरा न करने पर 157 विद्यालयों व महाविद्यालयों का अनुदान रोक दिया था।
नतीजतन यहां कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन भी रुक गया। लिहाजा कुछ विद्यालयों व महाविद्यालयों के संचालक इस मामले को लेकर हाई कोर्ट गए, जहां उनके पक्ष में फैसला हुआ।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शासनादेश में कहा गया है कि इन विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारी उत्तर प्रदेश हाईस्कूल इंटरमीडिएट वेतन वितरण अधिनियम 1971 के तहत रखे गए हैं।
इनका वेतन व पेंशन राजकोष से दिया जाता है। इन विद्यालयों की मान्यता संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से प्रदान की गई है।
चूंकि शासन ही शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन व पेंशन देता है। इसलिए बगैर मान्यता समाप्त किए इनका वेतन रोकना उचित नहीं है।
उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थाओं के प्रधानों, अध्यापकों व अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति व सेवा शर्तें) विनियमावली 2009 में स्थानांतरण का प्रावधान है।
इसलिए जिन विद्यालयों में छात्रों की पर्याप्त संख्या नहीं है, वहां के शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में जरूरत के आधार पर स्थानांतरित किया जा सकता है लेकिन पहले इनको चलाने का प्रयास होना चाहिए।
इसलिए शासन स्तर पर इन विद्यालयों को अनुदान बहाल करने का निर्णय लिया गया।
इन शर्तों की अनुपालना जरूरी
वैसे संस्कृत विद्यालय जो पूरी तरह से बंद हैं और वहां छात्र संख्या भी शून्य है, को पहले पुनर्जीवित कर चलाने का प्रयास होना चाहिए।
अगर यह संभव नहीं हो पाया तो वहां कार्यरत शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों को ऐसे किसी विद्यालय में समायोजित किया जाएगा, जहां स्वीकृत पद और पर्याप्त संख्या में छात्र होंगे।
वहीं जिन विद्यालयों में मानक के अनुसार पर्याप्त संख्या में छात्र नहीं हैं, उन्हें तीन माह का समय दिया जाएगा ताकि छात्रों को भर्ती किया जा सके।
ऐसे विद्यालय जहां मानक के अनुसार अवस्थापना सुविधा नहीं है, उन्हें इसे पूरा करने के लिए तीन माह का समय दिया जाएगा।