चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ ही प्रदेश में मोदी लहर की ताकत का भी पता चल जाएगा। इस बार कई भाजपा विधायक लोकसभा चुनाव में हाथ आजमा रहे हैं।
भाजपा विधायकों के अलावा सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुलायम सिंह यादव, चौधरी अजित सिंह और नरेंद्र मोदी की जीत-हार पर से ही परदा नहीं हटेगा बल्कि, सूबे में मोदी लहर की ताकत का सच भी सामने आएगा।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के लहर में भी भाजपा की पहुंच से बाहर रही कुछ सीटों पर जीत-हार यूपी के सियासी मूड में बदलाव की बानगी देगी।
यह भी साफ होगा कि यूपी में विधानसभा की कितनी सीटों पर उपचुनाव होना है, क्योंकि कई विधायक भी मैदान में है। यह भी साफ होगा कि यूपी के राजनीतिक सूरमा अब कितने ताकतवर बचे हैं।
मोदी लहर की कसौटी
दरअसल मोदी लहर की कसौटी की बात इसलिए भी उठ रही है, क्योंकि यूपी में कुछ लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा अभी तक कभी नहीं जीती है।
यहां तक कि 1991 में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन के ज्वार में भी। इन सीटों में अंबेडकरनगर, सलेमपुर, घोसी, मैनपुरी, संभल और फूलपुर शामिल हैं।
इनमें से अगर कुछ सीटों पर भी पार्टी अपना परचम फहराने में कामयाब रहती है तो साबित हो जाएगा कि यह लहर बहुत ताकतवर रही है।
सपा के सबसे ज्यादा विधायक
\सपा ने सबसे ज्यादा 15 विधायकों को मैदान में उतारा है। इनमें शाहिद मंजूर मेरठ, राममूर्ति वर्मा अंबेडकरनगर, पारसनाथ यादव जौनपुर, सुरेन्द्र पटेल मिर्जापुर, विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह कैसरगंज और कैलाश चौरसिया वाराणसी में शामिल हैं। ये सभी मंत्री हैं।
इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय डुमरियागंज से चुनाव लड़ रहे हैं।
इनके अलावा विधायक नंदिता शुक्ला को गोंडा, राजमती निषाद गोरखपुर, गुलाम मोहम्मद बागपत, जफर आलम अलीगढ़, रामेश्वर सिंह फर्रुखाबाद, मित्रसेन यादव फैजाबाद, बेचई सरोज लालगंज व राधेश्याम सिंह कुशीनगर से चुनाव लड़ रहे हैं।
दूसरे नंबर पर भाजपा
भाजपा ने 12 विधायकों और एक विधान परिषद सदस्य को मैदान में उतारा है। इनमें राघव लखनपाल सहारनपुर, हुकुम सिंह कैराना, कुंवर सर्वेश सिंह मुरादाबाद, डॉ. महेश शर्मा गौतमबुद्धनगर, अजय मिश्र टेनी लखीमपुरखीरी, उमाभारती झांसी, साध्वी निरंजन ज्योति फतेहपुर, कलराज मिश्र देवरिया, केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर व सावित्री बाई फूल बहराइच से चुनाव लड़ रही हैं।
विधान परिषद सदस्य डॉ. नैपाल सिंह रामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के सहयोगी अपना दल की विधायक अनुप्रिया पटेल भी मिर्जापुर से चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने 6 विधायकों को चुनाव मैदान में उतारा है।
इनमें विधायक नवेद मियां रामपुर, संजय कपूर पीलीभीत, विवेक सिंह बांदा, संजय जायसवाल बस्ती, ललितेश पति त्रिपाठी मिर्जापुर व मुकेश श्रीवास्तव कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। बसपा ने भी चार विधायक रामप्रसाद चौधरी को बस्ती, के.के. ओझा को कैसरगंज, शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को आजमगढ़ व विजय कुमार को बहराइच से मैदान में उतारा है।
इसके अलावा पार्टी विधान परिषद सदस्य मुकुल उपाध्याय को गाजियाबाद, रविशंकर पप्पू को सलेमपुर से चुनाव लड़ा रही है। रालोद के विधायक करतार सिंह भड़ाना कैराना सीट से मैदान में हैं।
सपा भाजपा विधायक आमने सामने
कैसरगंज, कैराना व रामपुर में विधायक ही आमने-सामने लड़ रहे हैं। इसलिए किसी न किसी विधायक की हार तो तय ही ही है।
हो सकता है कि कहीं-कहीं आमने-सामने लड़ रहे दोनों विधायक हार जाएं और जीत किसी तीसरे के हिस्से में आ जाए।
ऐसी सीटों में कैराना में भाजपा के हुकुम सिंह व रालोद के करतार सिंह, कैसरगंज में सपा सरकार में मंत्री विनोद कुमार सिंह ‘पंडित’ व बसपा के विधायक केके ओझा, रामपुर में भाजपा के नैपाल सिंह और कांग्रेस विधायक नवेद मियां, बागपत में भी विधान परिषद सदस्य बसपा के प्रशांत चौधरी और सपा के विधायक गुलाम मोहम्मद आमने-सामने हैं।
मंत्रियों के भी भाग्य का फैसला
प्रदेश के छह तो केंद्र के सात मंत्रियों की तकदीर का भी निर्णय शुक्रवार को होना है।
केंद्र सरकार के मंत्रियों में श्री प्रकाश जायसवाल कानपुर, अजित सिंह बागपत, आरपीएन सिंह कुशीनगर, जितिन प्रसाद धौरहरा, प्रदीप जैन आदित्य झांसी, बेनी प्रसाद वर्मा गोंडा और केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया शामिल हैं।
इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में कुल जो 40 विधायक चुनाव लड़ रहे हैं, उनमें दो विधायक यूपी के बाहर के हैं और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। ये हैं नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल।