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मोदी की नई सरकार के पहले बजट से सभी वर्ग को ढेरों उम्मीदें

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अयोध्या। भारी बहुमत से एकबार फिर सत्ता में आई मोदी सरकार से सभी वर्गों को खासी उम्मीदें हैं। पांच जुलाई को आने जा रहे पहले बजट से जहां युवाओं को रोजगार के साथ फ्री पढ़ाई चाहिए, वहीं गृहणियों को मंहगाई कम होने के साथ किसी भी अस्पताल में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलने की आस है।
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किसानों की मांग है कि उन्नतिशील खेती के लिए कृषि यंत्रों व बीजों पर छूट बढ़ाने के साथ लागत के हिसाब से फसलों का दाम बढ़े। व्यापारियों ने एक स्वर में जीएसटी प्रणाली को सरल करने पर जोर दे रहा है। कर्मियों को सरकार से पुरानी पेंशन लागू करने की उम्मीद है। केंद्र की नई सरकार के आने वाले आम बजट पर युवाओं और गृहणियों का मानना है कि देश की अर्थ को सुदृढ़ किए जाने के साथ आम लोगों को फ्री दवाई व फ्री पढ़ाई की सुविधा मिलनी चाहिए।
इससे प्रत्येक अमीर-गरीब तबके में सामानता आने के साथ लोगों को आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होंगे। युवाओं का खासतौर पर मानना है कि नए बजट में रोजगार के अवसर सृजित किए जाने चाहिए, जिससे शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच जुलाई को प्रस्तावित बजट को लेकर किसानों ने अपनी राय बेबाकी से दी है।
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सबका कहना है कि उन्नतिशील खेती के लिए कृषि यंत्रों व बीजों पर छूट दी जाय। साथ ही फसलों का लागत मूल्य भी बढ़ाया जाए। जिससे किसानों की आय वास्तव में दोगुनी हो सके। इन सबके अलावा माइनरों में समय से पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जाय। केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर विभिन्न प्रकार के व्यापारियों ने एक स्वर में जीएसटी प्रणाली को सरल करने पर जोर दिया है।
सबका मानना है कि जीएसटी की दरों में कमी के साथ ही इस प्रणाली को और आसान बनाया जाय, ताकि छोटे से बड़ा हर व्यापारी आसानी से व्यापार कर सके। साथ ही व्यापारियों ने सरकार की इस दिशा में संचालित तमाम योजनाओं को धरातल पर लाने की बात कही है। वित्तमंत्री से इस बार कामकाजी वर्ग को बड़ी उम्मीद हैं कि वह कुछ ऐसा करेंगे जिसका उन्हें बड़ी बेसब्री से इंतजार है। वहीं सरकारी कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें इनकम टैक्स के स्लैब में और छूट मिलनी चाहिए। इस बजट में कुछ नया क्या होना चाहिए, लोगों को क्या-क्या उम्मीद है।
गृहणी तरविंदर कौर का मानना है कि मंहगाई पर रोक लगाई जानी चाहिए लेकिन इससे भी जरूरी है कि सरकार प्रत्येक वर्ग के लिए फ्री दवाओं का इंतजाम करे। घर का सर्वाधिक खर्च दवा व पढ़ाई पर है। इसपर लगाम लगने से खर्चे आधे हो जाएंगे। साथ दवाई व पढ़ाई फ्री होने से समाज में समानता भी आएगी।
गृहणी सुखवीर कौर का मानना है कि नए बजट में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जानी चाहिए। मनचाही एडमिशन फीस, मनचाहे नियम व कानून बिल्कुल नहीं होने चाहिए। सभी निजी स्कूलों के लिए गाइडलाइन निर्धारित की जानी चाहिए। इसमें कक्षाओं के अनुसार फीस का निर्धारण सरकार की ओर से किया जाना चाहिए।
युवा नौशाद अहमद सिद्दीकी बताते कि पांच जुलाई को आने वाले बजट में देश की सीमाओं की सुरक्षा देश के भीतर देशवासियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए। खासतौर उस वर्ग का जो उपेक्षित व अल्पसंख्यक हो। सुरक्षा ही देश के लिए सबसे अहम पहलू हैं, इसका नए बजट में विशेष तौर पर फोकस होना चाहिए।
प्रशिक्षित बेरोजगार आकाश गुप्त बताते हैं कि देश में बेरोजगारी के ग्राफ में काफी इजाफा हुआ है, इससे प्रशिक्षित बेरोजगारों की स्थिति और भी दयनीय हुई है। बजट में केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि बजट की एक बड़ी धनराशि रोजगार सृजन पर खर्च की जानी चाहिए, इससे युवा बेरोजगारों को सरलतापूर्वक रोजगार के अवसर मिल सकें।
छात्रा मीनाक्षी उपाध्याय बताती हैं कि जिस तरह से विभिन्न प्रकार से अभियान माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालयों में चल रहे हैं, उसी प्रकार के अभियान डिग्री कॉलेजों तक आने चाहिए। बजट में डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई फ्री की जानी चाहिए, जिससे प्रत्येक छात्र आसानी से एडमिशन लेकर पढ़ सके।
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