सियासत की चायपत्ती। उसमें टेक्नोलॉजी की अदरक। वादों का दूध और दावों का पानी।
सबसे बढ़ कर नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की चीनी मिला कर नमो टी-स्टॉल पर बनी चाय की चुस्कियों का मजा लोगों ने जम कर लिया।
वर्तमान की परेशानियों पर बात हुई तो भविष्य की उम्मीदों पर बहस।
यहां नहीं था नारों का शोर
बुधवार की शाम चाय पर चर्चा नमो के साथ में आम सियासी मीटिंगों के बनिस्बत काफी हल्का फुल्का माहौल रहा। यहां नारों का शोर नहीं था। नेता का जयघोष नहीं। बस नरेंद्र मोदी की आइडियोलॉजी को समझने की कोशिश जरूर नजर आ रही थी।
रिंग रोड सचिवालय कॉलोनी के सामने नरेंद्र टी-स्टॉल के संचालक 35 वर्षीय नरेंद्र शुक्ला सीतापुर के बिसवां के रहने वाले हैं और जानकीपुरम में सहारा सिटी के पास रहते हैं।
रोज के मुकाबले तिगुनी चाय बेच चुके हैं। कहते हैं कि, जब ये आयोजक उनसे मिले तो वे सहर्ष नमो टी स्टॉल लगाने के लिए तैयार हो गए।
उनका कहना है कि, नरेंद्र मोदी ने चाय वालों को खुद के कार्य पर सम्मानित होने का मौका दिया है। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सूरज श्रीवास्तव जो कि पेशे से सीए हैं। वे कहते हैं, इस कार्यक्रम के लिए बहुत मेहनत की है।
चाय का समय कुछ ऐसा होता है, जिसमें व्यक्ति हल्के मूड में होता है। इसलिए चर्चा बहुत ही सकारात्मक होती है। बीजेपी आईटी सेल से अनिल तिवारी लगातार टैबलेट से पूरे कार्यक्रम की तस्वीरें उतारने में लगे रहे।
टीवी स्क्रीन पर देख सके चर्चा
उनका कहना है, अगली बार का आयोजन यहां हम कराएंगे, जो कि 17-18 फरवरी को होने की संभावना है। दुबग्गा में पुलिस चौकी के सामने ओम कारेश्वर के पास चाय पर चर्चा नमो के साथ हुई। यहां पर भी टू वे सिस्टम न होने की वजह से लोगों की बात नहीं हो सकी। मात्र टीवी स्क्रीन पर चर्चा देख सके।
इसके साथ ही आपस में नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व पर बातचीत की जाती रही। चाय चर्चा स्टॉल दुबग्गा का की शुरुआत भाजपा के अवध प्रांत के मंत्री विजय प्रताप सिंह और जिला उपाध्यक्ष श्रीकृष्ण लोधी ने की।
स्टॉल ओम कारेश्वर मंदिर पर लगाया गया। जहां भगवानदीन गुप्ता ने चाय के स्वाद से लोगों को रुबरु करवाया।
यहां अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि अहमदाबाद से नरेन्द्र मोदी लोगों से सीधे देश की समस्याओं पर चर्चा की।