केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहयोग का माहौल बने तो यूपी में पशुपालन क्षेत्र के विकास में तेजी लाई जा सकती है। देश में एक भी नेशनल ब्रीडिंग सेंटर नहीं है। केंद्र सरकार चाहती है कि इसे दिल्ली के नजदीक ही खोला जाए।
हरियाणा या किसी अन्य प्रदेश के बजाय अगर यह उत्तर प्रदेश में बने तो अधिक फायदेमंद होगा। केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने रविवार को आईआईएसआर में पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि जहां ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारतीय गाय की नस्लों को अपने यहां ले जाकर 30-30 लीटर दूध देने योग्य बना चुके हैं वहीं, हम आज भी 17 प्रतिशत विदेशी नस्ल की गायों से दूध उत्पादन बढ़ाने की सोच रहे हैं।
अगले 10 वर्ष में जैसी कि संभावना है औसत तापमान 1 डिग्री बढ़ चुका होगा, उसमें ये विदेशी गायें उपयोगी नहीं रहेंगी। तब भारतीय गायें ही टिक सकेंगी। इसलिए जरूरी है कि अपना देश भारतीय नस्ल की गायों का लाभ उठाए।
नेशनल ब्रीडिंग सेंटर के लिए जमीन दे अखिलेश सरकार
नेशनल ब्रीडिंग सेंटर इसमें उपयोगी कड़ी बनेगा। इसके लिए हम राज्य सरकार से जमीन चाहते हैं। उम्मीद है, इसमें राजनीति आड़े नहीं आएगी।
उप्र में सूखे को लेकर केंद्रीय टीम के दौरे पर राधा मोहन ने कहा कि टीम ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। राज्य सरकार के साथ टीम काम कर रही है।
रिपोर्ट आने के बाद वह एनडीआरएफ के साथ हालात से निपटने के लिए काम करेंगे।
मथुरा में गो-अनुसंधान केंद्र भी संवारेंगे
कृषि मंत्री ने कहा कि मथुरा का गो-अनुसंधान केंद्र का हाल बुरा है। अगर राज्य सरकार उसके लिए एक प्रोजेक्ट बनाकर दे तो केंद्र उसे संवारने को भी उत्सुक है।
उनका मंत्रालय इसमें हर तरह से सहयोग करेगा। राज्य सरकार को एक पैसा खर्च नहीं करना होगा, वे केवल प्रोजेक्ट तैयार करें और केंद्र सरकार को दें।
एक हजार कृषि वैज्ञानिक भर्ती होंगे
उन्होंने कहा, प्रदेश के 74 जिलों में से 67 में कृषि विज्ञान केंद्र हैं। इनमें से केवल 40 के पास ही मोटरसाइकिलें हैं, उनमें भी अधिकतर खराब हैं। 19 के ट्रैक्टर खराब हैं तो कइयों की जीपें।
ऐसे में ये केंद्र सेवाएं देने में पिछड़ रहे हैं। आईसीएआर के विभिन्न संस्थानों में खाली पदों को भरने की भी जरूरत है। अगले वर्ष केंद्रीय संस्थानों में करीब एक हजार कृषि वैज्ञानिकों की भर्तियां की जाएंगी।
दूसरी हरित क्रांति को बताया लक्ष्य
कृषि उपज बढ़ाने के लिए केंद्रीय संस्थानों में तैयार हो रही नई प्रजातियों के फसलों को अपने राज्य में लोकप्रिय करने का काम राज्य सरकार का है।
कृषि मंत्री ने कहा, जहां अधिकतर राज्य सरकारें इन संस्थानों का सहयोग लेती हैं, उप्र में ऐसा देखने को नहीं मिला। कुछ राज्य बीज कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र द्वारा तैयार की जा रही प्रजातियों को दरकिनार कर देते हैं।