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वोट बैंक के लिए मोदी-मुलायम में चले ‘खूनी बाण’

Fri, 24 Jan 2014 09:38 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
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मोदी के ऊपर खूनी नेता का तमगा लगाने वाले मुलायम पर अब पलटवार हुआ है। गोरखपुर रैली में मोदी ने मुलायम पर मुजफ्फरनगर में दंगे कराने को लेकर कटाक्ष किया।
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गोरखपुर और वाराणसी में दूरी 200 किमी. है, पर गुरुवार को मुलायम व मोदी के तेवरों ने लोगों को यह दूरी महसूस नहीं होने दी।

जिस तरह दोनों तरफ से तीखे ‘शब्दबाण’ चले तो ऐसा लगा कि दोनों नेताओं के मंच दो कदम की दूरी पर आमने-सामने सजे हों।

एक-दूसरे पर वार करने में न कोई हिचक और न संकोच। यूपी के सियासी समर को भाजपा बनाम सपा में तब्दील करने को बेकरारी दोनों तरफ से दिखी।

कांग्रेस पर हमले से आगे बढ़कर मोदी व मुलायम ने एक-दूसरे पर इस तरह के शब्दबाण चलाए कि लोगों को लगे लड़ाई सिर्फ मोदी व मुलायम में ही है।

वाराणसी में मुलायम बोले, ‘मैं चुनाव में मोदी को इस हैसियत में ही नहीं रहने दूंगा कि वे यूपी को गुजरात बना सकें।’

वहीं मोदी ने गोरखपुर के मंच से जवाब दिया, ‘नेताजी! गुजरात के मायने भी जानते हैं आप। गुजरात बनाने का मतलब है 24 घंटे बिजली और सभी लोगों को काम। आपमें गुजरात बनाने की हैसियत है ही कहां।’

मोदी ने अपनी छवि को भले ही भगवा रंग न दिया हो लेकिन मुलायम ने उनका काम पूरा कर दिया।

गुजरात दंगों का हवाला और लोगों से मोदी से सावधान रहने का आह्वान करते हुए कहा, ‘भाजपा को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को कोई दूसरा आदमी नहीं मिला।
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उसने उस आदमी को उम्मीदवार बना दिया जिसके हाथ गुजरात में मारे गए लोगों के खून से रंगे हैं।

मोदी ने मुलायम पर निशाना साधा, ‘यूपी की सरकार बहन-बेटियों का सम्मान नहीं कर पा रही है। यूपी के लोगों की सुरक्षा नहीं कर पा रही है। यह प्रदेश को क्या सम्मान दिलाएगी।’

मोदी बोले, ‘बाप-बेटा मेरा पीछा कर रहे हैं।’ सपा की तरफ से जवाब आया, ‘मोदी को जब तक यूपी की सीमा से निकाल बाहर नहीं कर दिया जाता, तब तक पीछा होता रहेगा।’

मुलायम ने वाराणसी में न्यूज चैनल वालों की तरफ इशारा करते हुए दावा किया, ‘विराट रैली है, घूमकर देख लो और कैमरा भी घुमा दो ताकि लोग देख लें कितनी बड़ी रैली है।’
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गोरखपुर में मोदी बोले, ‘बहुत बड़ी रैली है। यह रैली देश की बदलती हवा का संकेत है। इस रैली में आपकी आवाज बनारस की गलियों में गूंज रही है।’

वोटों के इंतजाम पर नजर
सिर्फ शब्दों से एक-दूसरे पर प्रहार नहीं हुए बल्कि अपने-अपने वोटों के इंतजाम के लिए हर बात पर नजर भी टिकी रही।

मोदी हिंदुत्व पर तो नहीं बोले लेकिन जो कुछ और जिस अंदाज में बोले, वह मुलायम विरोधी वोटों को लामबंद करने की कोशिश का हिस्सा ही लगा।
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