विवादित ढांचे के पीछे आबाद आलमगंज कटरा निवासी परिवारों के ज्यादातर पुरुष यौमेगम मनाने हाजी महबूब के घर गए थे। इनके परिवारीजन 6 व 7 दिसबंर 1992 की घटना को याद कर कांप उठते हैं। 40 वर्षीय अफरोज बानो अधिग्रहीत परिसर की बैरिकेडिंग की ओर दिखाते हुए कहती हैं कि सब कुछ आंखों से देखा, कैसे पुलिस मौन थी और कारसेवक गुंबद पर चढ़ते जा रहे थे।
तीन घंटे में सब कुछ ध्वस्त हो गया। उनके ससुर खुदाबख्श तब 60 साल के थे, जिन्हें सात दिसंबर को घर से बाहर भागते वक्त भीड़ ने मार डाला। खुदाबख्श के 33 वर्षीय बेटे नजीर बोले घटना में सब तबाह हो गया, अब हाशिम चचा स्वार्थ के लिए मंदिर बनाने की बात करते हैं। उनको जन्नत नसीब नहीं होगी।
मुहल्ले की 33 वर्षीय फूलजहां ने वालिद फतेह मुहम्मद को खोया है, तो इशरत ने भी जान गंवाई थी। तीनों के परिवारीजनों के दो-दो लाख रुपये सरकार से मिले थे। जबकि दर्जनों घायलों को ढाई हजार से सात हजार तक मिला था। कमेटी ने अयोध्या में 100 लोगों के तबाह हुए घर बनवाए। सरकार ने तो कुछ नहीं दिया।
10 साल बाद पड़ेगी तारीख तो कैसी होगी पैरवी : हाशिम
कैसे पैरवी होगी.. मुकदमा जानत हौ कहां है, अब तारीख सुप्रीमकोर्ट में 10 साल बाद पड़ेगी। हम जिंदा रहेंगे का। यह बात हाशिम ने घर के अंदर चंद खास लोगों के बीच कही। वे 12 बजे बाबरी मस्जिद मामले के अधिवक्ता जफरयाब जिलानी के छोटे भाई मसूद जिलानी व मिल्ली कौंसिल के सदस्य मौ. यासिन अली उस्मानी से मिलकर घर पहुंचे थे।
बाहर दोनों में बातचीत भी रस्मी रही। सिर्फ हाल-चाल पूछा, मुकदमे की बात हुई न हाशिम से कोई शिकायत। मीडिया के लोग भी कोई बात नहीं कर सके। सूबे के मंत्री आजम खां के बयान पर भतीजे असलम की तल्ख टिप्पणियों पर हाशिम हुंकारी भर रहे थे। हाजी महबूब निशाने पर थे।
इस बार छह दिसंबर पर अयोध्या में भक्तों का तांता पहले जैसा था। मंदिर गुलजार थे। वाहन बेरोकटोक दौड़ रहे थे। न रूट डायवर्जन था, न फोर्स किसी को तंग कर रही थी। बस, सबके बीच चर्चा थी तो केवल बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाशिम अंसारी में आए बदलाव और उसके पीछे छिपी कहानियों की।
यौमेगम और शौर्य दिवस के आयोजनों में भी हाशिम की ख्वाहिशें तलाशने में सब लगे रहे। जो लोग हाशिम की लड़ाई को शान मानते थे, अल्लाह का बंदा कहते थे, वे नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ओर से ब्रेनवॉश कराए जाने की बात कहते नहीं चूक रहे थे।
छह दिसबंर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर यौमेगम व शौर्य दिवस के आयोजन हर साल रस्मी रहते हैं लेकिन इस बार हाशिम अंसारी के बयानों की गर्मी छाई रही।
हाशिम कर रहा है मुलायम-अखिलेश की जय-जयकार
हाजी के घर के सामने अयोध्या के सपा विधायक व पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय पवन ने कहा कि हमने हाशिम को समझा दिया है, अब तो मुलायम सिंह का संदेश भी मिल गया है। वह सुबह से मुलायम-अखिलेश की जय-जयकार कर रहे हैं।
इसी बीच हाजी महबूब आ गए और विधायक पवन पांडेय से बोले-कैसे मिलने चले गए हाशिम से, वे ब्लैकमेल कर रहे हैं, तुम लोग ब्लैक मेल हो रहे हो। मुकदमे में क्या हैसियत है उनकी।
यहां यौमेगम के मंच पर भी हाशिम अंसारी को जमकर कोसा जाता रहा। बाबरी मस्जिद मामले के अधिवक्ता मुख्ताक अहमद, जफरयाब जिलानी के छोटे भाई मसूद जिलानी व मिल्ली कौंसिल के सदस्य मो. यासिन अली उस्मानी रहे हों या स्थानीय वक्ताओं में मौलाना जलाल असरफ समेत दर्जनभर लोग।
वक्ताओं ने हाशिम में बदलाव के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके सिपहसालार अमित शाह की टीम की ओर से ब्रेनवॉश करने तक की बात कही।
हालांकि दोनों वर्गों के ऐसे तमाम दुकानदार, कारोबारी और नौकरीपेशा लोग मिले, जो हाशिम को बेटे की नौकरी और निजी जरूरतों के लिए मोदी के मुरीद बनने में भलाई की बात कही।
चार दिन से हाशिम के बदलते बयान सुन रहे पूना से आए बिल्डर्स चेतन एम देसाई, साड़ी कारोबारी गोरख सी गवली भी उन्हें भरोसेमंद नहीं मानते। कहते हैं कि मंदिर-मस्जिद विवाद से चमके नेताओं की बढ़ी हैसियत और हाशिम की गरीबी बदलने को मजबूर कर रही है।