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जेटली के बजट में दिखी यूपी के 'अच्छे दिनों' की तस्वीर

Fri, 11 Jul 2014 03:14 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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भले ही रेल बजट में यूपी को उम्मीद के मुताबिक न मिला हो पर आम बजट में सूबे के लिए काफी कुछ है। बजट में यूपी के लिए अनेक योजनाओं के लिए आवंटन अच्छे दिनों की तस्वीर खींचते हैं।
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वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जो कुछ दिया उससे भविष्य में यूपी के अच्छे दिन आने का भरोसा बढ़ा है। हालांकि वित्त मंत्री के पिटारे से यूपी के लिए जो कुछ निकला उस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एजेंडे की छाप दिखती है।

प्रदेश में नदियों के घाटों के सौंदर्यीकरण, अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बौद्ध सर्किट और बुनकरों के कल्याण की योजनाएं परवान चढ़ेंगी।

लखनऊ मेट्रो के लिए भी टोकन मनी का प्रावधान करके इस योजना पर बजटीय मुहर लगा दी। नमामि गंगा और जल परिवहन की योजनाओं से भी यूपी को काफी लाभ मिलेगा।
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सर्वाधिक काम यूपी में होगा

देश को प्रधानमंत्री और भाजपा को बंपर कामयाबी देने वाले देने वाले सूबे के लोगों को आम बजट से काफी उम्मीदें थी। इनमें से कुछ पूरी हुई हैं।

बजट में उन योजनाओं के लिए धन का प्रावधान किया गया है जिनका मोदी अपने भाषणों में जिक्र करते थे। उन्होंने वाराणसी समेत कई जगह गंगा की बदहाली, बुनकरों की परेशानियों, ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने जैसे मुद्दे उठाए थे।

उनके एजेंडे के ये सभी बिंदु जेटली के बजट का हिस्सा हैं। समन्वित गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगा) के लिए 2037 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक गंगा देश के जिस भूभाग से गुजरती है, उसमें सबसे ज्यादा हिस्सा यूपी का है। जाहिर है, नमामि गंगे योजना के तहत सर्वाधिक काम यूपी में होगा।

बनेंगे पांच पर्यटन स्‍थल

गंगा के जीर्णोद्धार के लिए संसाधन जुटाने को प्रवासी भारतीय गंगा निधि भी बनाई जाएगी। इसका लाभ भी यूपी को ही ज्यादा मिलेगा।

कई शहरों में नदियों के घाटों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इनमें तीन शहर, वाराणसी, इलाहाबाद और कानपुर उत्तर प्रदेश के हैं।

पांच सौ करोड़ रुपये से देश में पांच पर्यटन क्षेत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सारनाथ-गया-वाराणसी बौद्ध सर्किट भी शामिल है।

इसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। मोदी इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को संजोने का जिक्र करते रहे हैं।

जल परिवहन एक बड़ी योजना

वाराणसी ही नहीं यूपी के बुनकर भी उनके एजेंडे का हिस्सा रहे हैं। बजट में वाराणसी में हथकरघा व्यापार सुविधा केंद्र के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

देश में दो सौ करोड़ रुपये से आठ बड़े टैक्सटाइल क्लस्टर बनाने की घोषणा की गई है। तीन क्लस्टर यूपी के वाराणसी, बरेली और लखनऊ में बनेंगे। कृष्ण की नगरी मथुरा की विरासत को संजोया जाएगा।

विरासत (हेरिटेज) संरक्षण के लिए दो सौ करोड़ रुपये से प्रारंभ होने वाली राष्ट्रीय विरासत शहर विकास एवं संवर्धन योजना (ह्रदय) के लिए देश के चुनिंदा शहरों में मथुरा को शामिल किया गया है।

बजट में अहमदाबाद में मेट्रो के लिए बजट की व्यवस्था की गई है तो लखनऊ के लिए भी। यूपी के हिस्से में एक बड़ी परियोजना जल परिहवन की है। इलाहाबाद से हल्दिया तक जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट के लिए 4200 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
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मोदी के वाराणसी का खास ध्यान

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र होने के कारण बजट में वाराणसी का खास ध्यान रखा गया है। अधिकांश योजनाएं किसी न किसी रूप में वाराणसी से जुड़ी है। गंगा के घाटों के विकास से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र बनाने तक में वाराणसी को प्राथमिकता दी गई है। वहां टैक्सटाइल क्लस्टर भी बनेगा।

यूपी के लिए खास योजनाएं:
-समन्वित गंगा संरक्षण मिशन (नमामि गंगा) के लिए 2037 करोड़। इसमें सर्वाधिक काम यूपी में होगा।
-कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद समेत देश के सात शहरों में नदियों के किनारे घाट विकास और सौंदर्यीकरण के लिए 100 करोड़।

-वाराणसी, बरेली और लखनऊ समेत देश के आठ शहरों में दो सौ करोड़ रुपये से टैक्सटाइल क्लस्टर।
-सारनाथ-वाराणसी-गया बौद्ध सर्किट समेत पांच पर्यटन केंद्र के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये।

-अहमदाबाद के साथ ही लखनऊ मेट्रो के लिए 100 करोड़ बजट का प्रावधान।
-इलाहाबाद से हल्दिया (पश्चिमी बंगाल) तक जल परिहवन के लिए जल मार्ग विकास प्रोजेक्ट को 4200 करोड़ रुपये।
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