लखनऊ। स्ट्रोक, नसों की बीमारी और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में फिजियोथेरेपी से मरीजों को राहत देने के नए तरीके सामने आ रहे हैं। आधुनिक तकनीकों से इलाज के साथ शरीर की कार्यक्षमता सुधारने में भी मदद मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शारीरिक परेशानियों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर इलाज और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना जरूरी है।
रविवार को निरालानगर के एक होटल में तीसरे अंतरराष्ट्रीय फिजियोथेरेपी सेमिनार में करीब 400 विशेषज्ञ जुटे। लंदन अकादमी ऑफ स्पोर्ट्स एंड हेल्थ साइंस और स्पेन की मायोफंक्शनल पोस्टुरल रिहैबिलिटेशन साइंस की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वाइब्रेशन साइंस और आयन थेरेपी पर चर्चा हुई।
आयोजक सचिव डॉ. संजय शुक्ला ने फिजियोथेरेपी की उपयोगिता बताई। मुख्य वक्ता डॉ. सैय्यद मोहम्मद वारिस ने आयन थेरेपी के इस्तेमाल की जानकारी दी। डॉ. सैफ सईद अल रियामी, डॉ. सिल्वेरियो डे रोक्को और डॉ. राजेंद्र कुमार सहित कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
स्ट्रोक और जोड़ों के दर्द में कारगर है आधुनिक फिजियोथेरेपी।
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