जैसी कि उम्मीद थी, विधान परिषद की 13 सीटों के लिए हुए चुनाव में शुक्रवार को जमकर जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग हुई। इसका सबसे ज्यादा फायदा बसपा को हुआ। उसके तीनों प्रत्याशी प्रथम वरीयता के मतों से ही चुनाव जीत गए।
वहीं, अपने विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बावजूद सपा अपने आठों प्रत्याशियों को सफल रही। हालांकि उसके पांच उम्मीदवारों की जीत दूसरी वरीयता के वोटों से हुई।
(विधान परिषद चुनाव: जीत के बाद जश्न में डूबे सपा व बसपाई, तस्वीरें)
भाजपा को 8 अतिरिक्त वोट मिले, लेकिन वह अपने दूसरे प्रत्याशी को नहीं जिता सकी। उसे भी भितरघात का सामना करना पड़ा। जमकर क्रॉस वोटिंग का सामना करने के बावजूद कांग्रेस अपने प्रत्याशी को जिताने में सफल रही। प्रथम वरीयता के मतों से जीतने के लिए हर प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के 29 वोट चाहिए थे।
शुक्रवार सुबह नौ से अपराह्न चार बजे तक हुई वोटिंग में सपा के 8 उम्मीदवारों को 232, बसपा के तीन प्रत्याशियों को 90, भाजपा के दो प्रत्याशियों को 51 तथा कांग्रेस प्रत्याशी को पहली वरीयता के 26 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित मतों का कोटा प्राप्त नहीं कर सका। आखिर में भाजपा प्रत्याशी से ज्यादा मत पाने पर उसे निर्वाचित घोषित किया गया।
ये रही बसपा व सपा की स्थिति
बसपा: 80 विधायक थे। 3 प्रत्याशियों को जिताने के लिए 87 वोट चाहिए थे। बाला प्रसाद अवस्थी, राजेश त्रिपाठी समेत चार विधायकों ने बगावत कर दी। यानी उसे 11 अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी। उसने सधी रणनीति से 14 अधिक वोट जुटा लिए और अतर सिंह राव, दिनेश चंद्रा व सुरेश कुमार कश्यप जीत गए।
सपा: 8 प्रत्याशी थे। प्रथम वरीयता के मतों से जिताने के लिए कुल 232 वोट चाहिए थे। जोड़तोड़ होने से उसके माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम यादव, राम सुंदर दास निषाद जगजीवन प्रसाद ही प्रथम वरीयता से जीत सके। साफ है आवंटित मतों में कई छिटक कर बसपा या भाजपा के पाले में चले गए।
जीते हुए प्रत्याशियों को इतने मिले वोट
सपा----प्रथम वरीयता
बलराम यादव----33
राम सुंदर निषाद----30
जगजीवन प्रसाद----31
बुक्कल नवाब----28
यशवंत सिंह----28
शतरुद्र----28
रणविजय सिंह----27
कमलेश पाठक 27
बसपा----प्रथम वरीयता
अतर सिंह राव----31
दिनेश चंद्रा----30
सुरेश कुमार कश्यप----29
कांग्रेस----प्रथम वरीयता
दीपक सिंह----26
भाजपा----प्रथम वरीयता
भूपेंद्र चौधरी----31
दयाशंकर सिंह----20 (हारे)