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Mission Election : नरम-गरम हिंदुत्व की दुविधा में समाजवादी, अखिलेश बोले- अभी हम सॉफ्ट थे लेकिन अब हार्ड होंगे

Sun, 11 Jun 2023 07:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अजित बिसारिया, लखनऊ

सार

मंदिर में इबादत के जरिये धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, पर उदार हिंदुत्व जैसे शब्दों के वजूद से ही इन्कार किया। इन कोशिशों में पुराने वोट बैंक को सहेजे रखने के साथ ही जनाधार बढ़ाने की कशमकश भी साफ दिखी।
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file pic..... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नैमिषारण्य में समाजवादी नरम-गरम हिंदुत्व की दुविधा में दिखे। मंदिर में इबादत के जरिये धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, पर उदार हिंदुत्व जैसे शब्दों के वजूद से ही इन्कार किया। इन कोशिशों में पुराने वोट बैंक को सहेजे रखने के साथ ही जनाधार बढ़ाने की कशमकश भी साफ दिखी। अब ये प्रयोग कितने सफल होते हैं, यह तो भविष्य में अवाम ही तय करेगा।

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दो दिन चले प्रशिक्षण शिविर के समापन के अवसर पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ''सॉफ्ट हिंदुत्व'' को भाजपा का गढ़ा शब्द बताया। समाजवादियों को पहले से ही उदार बताते हुए अब सख्त होने का संदेश दिया। अलबत्ता ''सख्ती'' किस रूप में होगी, यह राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी रहस्य है।

सपा के लिए लोहिया की बनाई सड़क ही सबसे मुफीद -प्रो. आनंद कुमार
जेएनयू के सेवानिवृत्त प्रो. आनंद कुमार कहते हैं कि समाजवादी विचारक राम मनोहर लोहिया ने 1950 में लिखे ''हिंदू बनाम हिंदू'' में कट्टरपंथी और उदारवादी हिंदुत्व की अवधारणा को स्पष्ट कर दिया था। इस लेख के अनुसार, उदार हिंदूत्व की अवधारणा जब-जब बढ़ी, सनातन धर्म का फैलाव हुआ। सहिष्णुता का भाव बढ़ा और उतनी ही संपत्ति के संचय की प्रवृत्ति दिखी, जो जीवन के लिए आवश्यक है। कट्टरपंथी अवधारणा के बढ़ने पर इसका ठीक उल्टा हुआ। अतीत में कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी कभी महिलाओं के सवाल पर मुस्लिम कट्टरपंथियों और कभी अयोध्या मंदिर का ताला खुलवाकर हिंदू कट्टरपंथियों को साथ लेने की जद्दोजहद में दिखे। इनके कारण बाद में अवाम में पले-बढ़े वैचारिक उभार ने कांग्रेस का क्या हश्र किया, हम सब देख रहे हैं। प्रो. आनंद कुमार आगे कहते हैं कि इस मामले में सपा को महात्मा गांधी और राममनोहर लोहिया की बनाई सड़क पर ही आगे बढ़ना चाहिए। इसके इतर जो कोशिश करते हुए दिख रहे हैं, वह उन्हें भाजपा के जाल में ही फंसाएगी।
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यह भाजपा के पिच पर खेलने जैसा-प्रो. एनके मिश्रा
बीएचयू के प्रो. एनके मिश्रा कहते हैं कि अखिलेश यादव हों या राहुल गांधी, वे मान रहे हैं कि पारंपरिक राजनीति पर चलकर आगे नहीं बढ़ पाएंगे। अनेक ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं, जिसमें वे अपने लिए वोट बैंक के नए समीकरण बनाते हुए दिख रहे हैं। उदार हिंदुत्व को लेकर वे जो कर रहे हैं या कर रहे हैं, वो भाजपा के पिच पर जाकर मैच खेलना है। बेहतर तो यह होता कि जनता के बीच जाकर वास्तविक मुद्दों पर संघर्ष करते।

एहतियात के साथ फैलाव का प्रयास
लखनऊ विवि में राजनीति शास्त्र के शिक्षक डॉ. संजय गुप्ता कहते हैं कि सपा हिंदुओं के और बड़े दायरे में फैलाव चाहती है, लेकिन कदम एहतियात के साथ आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि मुस्लिम वोट बैंक के लिहाज से उसे कोई नुकसान न हो। मुरादाबाद के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस और मेरठ के नगर निगम चुनाव में एआईएमआईएम का प्रदर्शन उसके लिए चिंता का सबब है। वहीं, समाजवादियों के ''सॉफ्ट से हार्ड'' बनने का आशय स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है, ताकि इस अवधारणा को समझा जा सके।

हम पक्के हिंदू, पर ''उदार हिंदुत्व'' जैसा कोई शब्द नहीं-राजेंद्र चौधरी
सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि उदार हिंदुत्व जैसा कोई शब्द नहीं होता। हम पक्के और सच्चे हिंदू हैं, पर राजनीति में धर्म के इस्तेमाल को उचित नहीं मानते हैं। हमारे लिए धर्म और धार्मिक उन्माद (फैनेटिक) में बहुत फर्क है। भाजपा जिस तरह से काम करती है, वो धार्मिक उन्माद की श्रेणी में आता है।

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