राजधानी लखनऊ में वरासत के एक मुकदमे में शरारती युवक ने राज्यपाल को पक्षकार बनाते हुए फर्जी तरीके से नोटिस राजभवन भेज दिया। मामला तब सामने आया जब फाइल राजभवन से कलेक्ट्रेट पहुंची। राज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए कार्रवाई का निर्देश दिया तो हड़कंप मच गया।
राजस्व संहिता 2006 लागू होने के बाद धारा-34 के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद कंप्यूटराइज्ड नोटिस पक्षकारों को जाता है। तहसीलदार का कहना है कि यह नहीं पता चल सका है कि यह हरकत किसने की है।
न्यायालय की फर्जी मोहर व हस्ताक्षर बनाकर किसी अज्ञात व्यक्ति ने जाली नोटिस तैयार कर लखनऊ से स्पीड पोस्ट किया है। ताकि तहसील की छवि धूमिल हो सके। राजभवन से कलेक्ट्रेट आया लेटर अभी मलिहाबाद नहीं आया है। जांच कराई जा रही है। ऐसा कार्य करने वाले व्यक्ति पर र्कारवाई की जाएगी।