प्रदेश में अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाओं के संचालन में केरल, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर राज्य नजीर बनेंगे। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इन राज्यों में योजनाओं के संचालन और मदरसों की व्यवस्था का अध्ययन करेगा। 13 साल बाद योजनाओं को शुरू करने से पहले विभाग योजनाओं के संचालन और ऋण वसूली को लेकर फुलप्रूफ कार्ययोजना बनाने की तैयारी कर रहा है।
दरअसल, प्रदेश में अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम से संचालित होने वाली टर्मलोन, शैक्षिक ऋण, व्यावसायिक प्रशिक्षण योजना, वाहन ऋण योजना सहित स्वयं सहायता समूह जैसी अहम योजनाएं 13 सालों से बंद हैं।
केंद्र से मिलने वाली राशि पर प्रदेश सरकार से स्टेट गारंटी के अभाव में वर्ष 2006 से पैसा नहीं मिल रहा था। केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने से योजनाओं की राशि पर स्टेट गारंटी मिलने में आसानी होने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम और उप्र. अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम ने बीते दिनों योजना के संचालन पर एमओयू साइन किया है।
इससे 13 साल से बंद इन योजनाओं के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। एमओयू साइन होने के बाद केंद्र सरकार ने फिलहाल टर्मलोन, शैक्षिक ऋण, माइक्रो फाइनेंस, महिला समृद्धि व जागरूकता शिविरों के लिए 42.61 करोड़ मंजूर किए हैं।
अध्ययन के लिए जल्द रवाना होगी टीम
उप्र अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम के एमडी एवं विभाग के संयुक्त सचिव आरपी सिंह ने बताया कि योजनाओं के संचालन से पहले धन जरूरत मंदों को किस तरह से पहुंचाई जाए और उसकी शत प्रतिशत वसूली कैसे हो? इसके लिए केरल, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में लागू कार्यपद्धति का अध्ययन किया जाएगा। क्योंकि वहां पर अल्पसंख्यकों के कल्याण योजनाओं का संचालन बेहतर तरीके से हो रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए निगम के निदेशक मंडल की सहमति मिल चुकी है। अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम इन राज्यों में जल्द ही अध्ययन के लिए भेजी जाएगी।