राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों की हालत ज्यादा खराब है।
मुजफ्फरनगर व शामली की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। इससे पहले भी प्रदेश में कई जगह अल्पसंख्यकों के साथ काफी दुखद घटनाएं घट चुकी हैं।
इससे उनके मन में असुरक्षा की भावना घर कर रही है। प्रदेश सरकार को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
आयोग के अध्यक्ष ने सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर मुजफ्फरनगर दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा।
साथ ही कैंपों में रह रहे दंगा पीड़ित अल्पसंख्यकों को जल्द से जल्द अपने घरों में बसाने की बात भी कही। वजाहत हबीबुल्लाह अखिलेश यादव से उनके आवास पर मिले।
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति का आयोग ने भी दो बार जाकर निरीक्षण किया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री को सौंपी।
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा, अब सरकार की प्राथमिकता बेघरों को वापस उनके गांवों में बसाने की होनी चाहिए। साथ ही सरकार को दंगा पीड़ितों की जान-माल की सुरक्षा का विश्वास दिलाना होगा।
मुख्यमंत्री ने आयोग के अध्यक्ष को बताया कि अब स्थिति में काफी सुधार है। पहले 51 हजार दंगा पीड़ित कैंपों में रह रहे थे, अब उनकी तादाद 17 हजार रह गई है।
इनमें कुछ तो अपने घरों में और कुछ रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। आयोग के अध्यक्ष ने सरकार से इस घटना में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने व निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने के लिए भी कहा है।
आयोग ने कहा, सरकार को यह भी प्रयास करने चाहिए कि मुजफ्फरनगर व आस-पास जाट व मुसलमानों के बीच जो दरार पैदा हो गई है उसे दूर किया जाए।
यह चुनौती है लेकिन इसे सरकार को स्वीकार करना होगा। ऐसे हालात एकदम नहीं बनने चाहिए कि कुछ गांव सिर्फ जाटों के हों जाएं और कुछ गांव सिर्फ मुसलमानों के।
वजाहत ने कहा, दंगे के दौरान काफी लोगों ने अच्छा काम भी किया है। ऐसे लोगों को भी सरकार चिन्हित करे। मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के अलावा आयोग के अधिकारी उपस्थित थे।
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