भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा।
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यूपी विधानसभा चुनाव में कड़े मुकाबले में चुनाव हारे पूर्व मंत्रियों, विधायकों और पार्टी के दिग्गज नेताओं को अब भाजपा संगठन और सरकार में समायोजित किया जाएगा। पार्टी ने अपने नेताओं का हौसला बनाए रखने के लिए उन्हें किसी न किसी रूप में सम्मान देकर उनका क्षेत्र व समाज में उपयोग करने की योजना बनाई है।
विधानसभा चुनाव में प्रदेश सरकार में मंत्री रहे सुरेश राणा, राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह, डॉ. सतीश द्विवेदी, आनंद स्वरूप शुक्ला, छत्रपाल गंगवार, चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय व लाखन सिंह राजपूत चुनाव हार गए हैं। इसी तरह विधायक रहे संगीत सोम, राघवेंद्र प्रताप सिंह, नरेश सैनी, हरिओम यादव और रामवीर उपाध्याय सहित अन्य दिग्गज भी चुनाव हारे हैं। प्रदेश महामंत्री अमर पाल मौर्य, प्रदेश उपाध्यक्ष सलिल विश्नोई भी चुनाव हारे है। पार्टी का मानना है कि त्रिकोणीय मुकाबले या जातीय समीकरण में ये प्रमुख चेहरे भले ही चुनाव हार गए, लेकिन उनका अपने समाज और क्षेत्र में प्रभुत्व है। इसका उपयोग करने के लिए उन्हें संगठन, राज्यसभा, निगम, आयोग और बोर्ड में जगह दी जाएगी। इनमें से कुछ नेताओं को विधान परिषद भी भेजा जा सकता है।
सभी दिग्गजों का होगा समायोजन
भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि विधान परिषद में मनोनीत कोटे की छह सीटों पर मनोनयन और विधानपरिषद की 13 सीटों पर चुनाव इसी साल होना है। फरवरी 2023 में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की पांच सीटों के भी चुनाव हैं। परिषद की इन सीटों पर पार्टी के सभी प्रमुख पदाधिकारी समायोजित कर दिए जाएंगे। स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र की 36 सीटों पर हो रहे चुनाव में भी पार्टी ने करीब 25 सीटों पर पुराने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मौका दिया है।