समाज कल्याण राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश द्वारा निर्माण कार्य की जांच का अपना ही आदेश पलटने से अधिकारी सांसत में हैं। काम की गुणवत्ता खराब बताई जा रही है। ऐसे में विभागीय अफसरों को भविष्य में खुद के फंसने का डर सता रहा है। अब ये बात दीगर है कि मंत्री के अपना आदेश वापस लेने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की बनाई कमेटी अपनी जांच जारी रखे हुए है।
चर्चित हो चुका ये मामला बलरामपुर का है। समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश दो जुलाई को राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय बलरामपुर में निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां दो करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से रसोई, डॉरमेट्री और डाइनिंग हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। इस विद्यालय का संचालन जनजातीय कल्याण निदेशालय करता है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता खराब बताते हुए धर्मेश ने तत्काल काम रोककर जांच कराने के आदेश वहां के जिलाधिकारी को दिए। इस पर जिला प्रशासन ने जांच के लिए पीडब्ल्यूडी और आरईडी (ग्रामीण अभियंत्रण विभाग) के इंजीनियरों की तीन सदस्यीय कमेटी बना दी।
जांच अभी चल ही रही है कि इसी बीच राज्यमंत्री ने बलरामपुर के डीएम को एक पत्र और लिखा कि जिलास्तरीय जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘संबंधित कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ किए जाने का निर्देश पत्र के माध्यम से जारी कर मेरे कैंप कार्यालय को अवगत कराने का कष्ट करें।’
राज्यमंत्री ने अपने पत्र में ये भी लिखा है, इस निर्माणाधीन भवन की नींव और आरसीसी पिलर की गहराई एक समान थी, जिसके चलते मैंने निर्माण कार्य रोकने के आदेश दिए थे। कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के अभियंताओं ने बताया कि निर्माण कार्य में जो भी कमियां पाई गईं थीं, उनको दूर किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जनहित में निर्माण कार्य पूरा कराया जाना आवश्यक है।
हालांकि, बताते हैं कि जिला प्रशासन की कमेटी अपनी जांच जारी रखे है। राज्यमंत्री ने जांच न कराने के बाबत पत्र 20 अगस्त को लिखा था, जबकि 26 अगस्त को कमेटी ने मौके पर जाकर जांच की। सूत्रों के मुताबिक, समाज कल्याण व जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारियों ने भी गुणवत्ता खराब होने का फीडबैक दिया है, जिसके चलते जांच जारी है। कुछ अधिकारियों ने ये मामला उच्चस्तर तक पहुंचाया है। इस बारे में बलरामपुर के डीएम कृष्णा करुणेश से बात करनी चाही, पर उनके सीयूजी और आवास के नंबर पर फोन करने के बावजूद संपर्क नहीं हो सका।