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अब शिक्षा विभाग में चली मंत्री जी की चिट्ठी

Mon, 02 Dec 2013 08:57 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
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समाजवादी सरकार में उल्टी गंगा बह रही है। यहां अफसर माननीय की शान में नहीं, बल्कि मंत्री अफसरों की शान में कसीदे काढ़ रहे हैं।
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यह काम कर दिखाया है बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी ने।

वह चाहते हैं कि 31 मार्च 2014 को रिटायर होने वाले शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव का कार्यकाल दो साल के लिए बढ़ा दिया जाए।

उन्होंने इसके लिए शिक्षा निदेशक को निष्ठावान, कुशल और ईमानदार बताने के साथ ही सफलतापूर्वक दायित्व निभाने वाला बताया है।

लेकिन इन निदेशक महोदय के बारे में विभाग में जो चर्चाएं हैं वह किसी से छिपी नहीं है।

मंत्री के इस पत्र के आधार पर मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार ने सचिव माध्यमिक शिक्षा से प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। प्रदेश में शिक्षा निदेशक के चार पद हैं।

माध्यमिक शिक्षा, बेसिक शिक्षा, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा में निदेशक के पद हैं।

मौजूदा समय विभाग के पास निदेशक स्तर के चार अधिकारी भी हैं। पर, एक निदेशक स्तर के अधिकारी अमरनाथ वर्मा को शासन में विशेष सचिव बना दिया गया है और तीन अधिकारियों में चारों निदेशालय का काम बांटा गया है।
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बासुदेव यादव माध्यमिक शिक्षा के निदेशक हैं और बेसिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त चार्ज उनके पास है।

सर्वेंद्र विक्रम सिंह एससीईआरटी और अवध नरेश शर्मा साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक हैं। शिक्षा विभाग में माध्यमिक और बेसिक शिक्षा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग देश की सबसे बड़ी बोर्ड परीक्षा आयोजित कराता है तो बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों को शिक्षित करके उनकी नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी निभाता है।

इन दोनों विभागों का एक ही निदेशक होने की वजह से काम किस गति से चल रहा है यह किसी से छिपा नहीं है।

बासुदेव यादव 31 मार्च 2014 को रिटायर हो रहे हैं। पर, बेसिक शिक्षा मंत्री चाहते हैं कि उनका कार्यकाल साल, छह महीने के लिए नहीं बल्कि पूरे दो साल के लिए बढ़ा दिया जाए।

क्या लिखा है मंत्री ने
मुख्यमंत्री जी, बासुदेव यादव पूरी निष्ठा, कुशलता एवं ईमानदारी से दोनों विभागों का दायित्व सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं।

इन्होंने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समय से पूर्ण कराकर आम जनता में सरकार की छवि बढ़ाई है।

वह मार्च 2014 में रिटायर हो रहे हैं, जबकि मार्च व अप्रैल में यूपी बोर्ड की परीक्षाएं भी होनी हैं। इसमें प्रदेश के 65 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल होंगे।
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परीक्षाफल जून के पहले सप्ताह में घोषित किया जाना है। यह एक संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण कार्य है। इसलिए इन्हें जून 2016 तक पुनर्नियुक्ति/सेवा विस्तार प्रदान करने का कष्ट करें।

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