प्रदेश के लाखों श्रमिक योगी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में आने जा रहे हैं। सरकार ने श्रमिकों को योजनाओं के अंतर्गत आर्थिक सहायता से जुड़े लाभ पारदर्शिता के साथ पहुंचाने के लिए पीएफएमएस के जरिए सीधे एकाउंट में दिए जाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन आधार के जरिए कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके अलावा अधिकाधिक श्रमिकों का पंजीकरण कराने के लिए तहसील स्तर पर समाधान दिवसों में कैंपों का आयोजन किया जाएगा।
सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार ने प्रदेश के समस्त क्षेत्रीय व जिला कार्यालयों से भवन व सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के कार्यों की समीक्षा में ये निर्देश दिए। प्रदेश में 81 लाख सन्निर्माण श्रमिक होने का अनुमान है। प्रदेश में पिछले दो महीनों में नए श्रमिकों के रजिस्ट्रेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 17 लाख से बढ़ाकर 43 लाख पहुंचाने में सफलता मिली है। 9.28 लाख पुराने श्रमिकों का नवीनीकरण भी कराया गया है। वर्तमान में सक्रिय श्रमिकों की संख्या 43.32 लाख से अधिक पहुंच गई है। कोविड-19 के दौरान 342 करोड़ रुपये आपदा सहायता योजना में तथा 261.21 करोड़ रुपये अन्य योजनाओं से श्रमिकों के हित में खर्च हुए।
सचिव मुख्यमंत्री ने श्रमिकों को योजनाओं का लाभ आसानी से दिलाने के लिए क्षेत्रीय व जिलास्तरीय अधिकारियों की टीम गठित कर व्यावहारिक कठिनाइयों को चिह्नित करने का निर्देश दिया। इससे प्रक्रिया का सरलीकरण किया जा सकेगा। उन्होंने ईंट भट्ठों में काम करने वाले श्रमिकों, चट्टान तोड़ने वाले तथा अन्य तरह के बहुलता वाले श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन कैंप लगाकर करने का निर्देश दिया।