मिल्कीपुर उपचुनाव में मिली हार के बाद सपा सांसद ने चुनाव आयोग, प्रदेश सरकार व स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने वोटों की डकैती डालकर बेईमानी से चुनाव जीता है। यह हिंदुस्तान सबसे बड़ी डकैती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की मर्यादा की धज्जियां उड़ाई गई।
उन्होंने कहा कि पहली बार चुनाव आयोग निष्क्रिय और लाचार रहा। जगह-जगह बूथ कैप्चरिंग हो रही थी। पीठासीन अधिकारी और भाजपा के बाहरी लोग फर्जी वोट डाल रहे थे। उन्हें सत्ता व बूथ पर लगे सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों का संरक्षण था। निष्पक्ष चुनाव होता तो भाजपा की जमानत न बचती। जो-जो घटनाएं हुई हैं, जिस तरह वोट लूटा गया है, यह हिंदुस्तान की आजादी व बाबा साहेब के संविधान के लिए काला दिन था। इस अन्याय और अत्याचार को लोकसभा में उठाएंगे। मिल्कीपुर की जनता व बहादुर कार्यकर्ताओं ने बहादुरी का परिचय दिया। पुलिस की लाठी खाकर भी वोट डालते रहे। उनकी बहादुरी का ख्याल रखते हुए उनके सम्मान और विकास के लिए खड़े रहेंगे।
जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव ने कहा कि धन व बैंक की डकैती तो सुना था, पहली बार लोकतंत्र में वोट की डकैती पड़ी है। भाजपा ने कई हजार लोगों को मताधिकार से वंचित कर लोकतंत्र की जो हत्या है, जिले का इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। मिल्कीपुर के बहादुर साथियों ने विषम परिस्थितियों में भी सपा को 85,000 वोट देकर साहस का परिचय दिया है, जो लोकतंत्र को बचाने का बहुत बड़ा कदम है। जनता ने उन्हें पूरी तरह जिताया है, लेकिन सरकार और प्रशासन की बेईमानी से सपा चुनाव हारी है।