अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद
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पहला चुनाव अवधेश प्रसाद 1974 में लड़े और कांग्रेस के हुबराज कोरी से हार गए। 1977 का अगला चुनाव वह जनता पार्टी से लड़े और हुबराज को हराकर पहली बार विधायक बने। 1980 का अगला चुनाव वह पासी समाज के माधव प्रसाद से हार गए, लेकिन 1985 व 1989 में उन्होंने माधव प्रसाद समेत कई अन्य को हराया। 1991 में राम लहर के दौरान पासी समाज के रामू प्रियदर्शी भाजपा से लड़े और अवधेश प्रसाद को हरा दिया। इसके बाद 1993, 1996, 2002 व 2007 में वह लगातार विधायक बने। इस दौरान 1993 से 2002 तक भाजपा से रामू प्रियदर्शी ही चुनाव लड़े और हारते गए। 2007 में पार्टी ने पासी समाज की ही ऊषा रावत पर दांव लगाया तो रामू प्रियदर्शी बसपा से चुनाव लड़े, फिर भी सभी को हार का सामना करना पड़ा।
2012 में सुरक्षित सीट मिल्कीपुर बनी तो अवधेश प्रसाद वहां से चुनाव लड़े। इस दौरान भाजपा से रामू प्रियदर्शी ही चुनाव लड़े और हारे। 2017 में भाजपा ने पासी समाज के ही गोरखनाथ बाबा पर दांव लगाया और वह जीत गए, लेकिन 2022 में वह फिर से हार गए। पिछले इन्हीं रिकॉर्ड के कारण सपाई उत्साहित दिख रहे हैं। जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव ने कहा कि भाजपा जान-बूझकर इसकी ब्रांडिंग कर रही है। उनके पास कोई अन्य मुद्दा नहीं बचा है। सभी जाति-धर्म का सपा को समर्थन है।
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर मांग की है कि मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में थाना इनायतनगर के थानाध्यक्ष देवेंद्र पाण्डेय, थाना कुमारगंज के थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह, थाना खण्डासा के थानाध्यक्ष संदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से अयोध्या से बाहर स्थानांतरित किया जाए व सपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों पर दर्ज एफआईआर निरस्त की जाए। श्यामलाल पाल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र के तीनों थानाध्यक्ष चुनाव की घोषणा होने बाद से अब तक सपा के एक दर्जन से अधिक निर्दोष पदाधिकारियों, सेक्टर प्रभारियों, कार्यकर्ताओं, ग्राम प्रधानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर भय का माहौल बना रहे हैं।